Free Horoscope, Indian Astrology ( ज्योतिष), Vastu,Read Palmistry (हस्तरेखा)
Sunday, 18 March 2018
Friday, 16 March 2018
Thursday, 15 March 2018
Rashi ke anusar navratri me ma navdurga ka pujan
राशि के अनुसार नवरात्रि में मां नवदुर्गा का पूजन
चैत्र नवरात्रि मैं यदि इस विधि के अनुसार मां दुर्गा का पूजन करेंगे तो मां दुर्गा शीघ्र आप पर प्रसन्न होगी और अपनी कृपा दृष्टि आप पर शीघ्र बनाएगी यदि राशि के अनुसार मां दुर्गा का पूजन करें जिस जातक की जो राशि हो वर्ष राशि प्रदान देवी का पूजन करें तो वह देवी आप पर शीघ्र प्रसन्न होकर आपको शुभ फल प्रदान करती है
आदिवासी के अनुसार मां भगवती दुर्गा की पूजा के बारे में जानेंगे किस राशि वाले जातक को किस प्रकार से किस देवी की पूजा करने पर शेषफल प्राप्त होगा भाई आप जानते हैं राशि के अनुसार पूजा विधि
मेष राशि
मेष राशि का स्वामी मंगल है और यह राशि अग्नि तत्व प्रधान राशि है अग्नि तत्व प्रधान होने के कारण इस राशि के जातकों के लिए मां भगवती महाकाली एवं महाकाली स्वरूपिणी कालरात्रि देवी का पूजन करना श्रेष्ठ एवं उत्तम फलदाई होगा
वृषभ राशि
वृषभ राशि का स्वामी दैत्य गुरु शुक्र है और यह राशि भूमि तत्व प्रदान है भूमि तत्व प्रदान राशि होने के कारण इस राशि के जातकों के लिए मां भगवती महासरस्वती एवं मां चंद्रघंटा देवी का पूजन करना श्रेष्ठ एवं उत्तम फलदाई रहेगा
मिथुन राशि
मिथुन राशि का स्वामी बुध है और यह वायु तत्व प्रधान राशि है वायु तत्व प्रधान होने के कारण मिथुन राशि के जातकों के लिए मां भगवती महालक्ष्मी स्वरूपिणी मां कुष्मांडा देवी का पूजन अर्चन करना श्रेष्ठ एवं उत्तम फलदाई रहेगा
कर्क राशि
कर्क राशि के स्वामी भगवान चंद्र देव है एवं यह जल तत्व प्रदान राशि है जल तत्व प्रदान राशि होने के कारण इस राशि के जातकों के लिए मां भगवती महासरस्वती एवं मां ब्रह्मचारिणी का पूजन करना श्रेष्ठ एवं उत्तम फलदाई रहेगा
वृषभ राशि का स्वामी दैत्य गुरु शुक्र है और यह राशि भूमि तत्व प्रदान है भूमि तत्व प्रदान राशि होने के कारण इस राशि के जातकों के लिए मां भगवती महासरस्वती एवं मां चंद्रघंटा देवी का पूजन करना श्रेष्ठ एवं उत्तम फलदाई रहेगा
मिथुन राशि
मिथुन राशि का स्वामी बुध है और यह वायु तत्व प्रधान राशि है वायु तत्व प्रधान होने के कारण मिथुन राशि के जातकों के लिए मां भगवती महालक्ष्मी स्वरूपिणी मां कुष्मांडा देवी का पूजन अर्चन करना श्रेष्ठ एवं उत्तम फलदाई रहेगा
कर्क राशि
कर्क राशि के स्वामी भगवान चंद्र देव है एवं यह जल तत्व प्रदान राशि है जल तत्व प्रदान राशि होने के कारण इस राशि के जातकों के लिए मां भगवती महासरस्वती एवं मां ब्रह्मचारिणी का पूजन करना श्रेष्ठ एवं उत्तम फलदाई रहेगा
सिंह राशि
सिंह राशि के स्वामी भगवान श्री सूर्य देव है और यह राशि अग्नि तत्व प्रदान राशि है अग्नि तत्व प्रदान राशि होने के कारण इस राशि के जातकों के लिए मां भगवती महालक्ष्मी अथवा मां कात्यायनी देवी का पूजा करना श्रेष्ठ एवं उत्तम फलदाई रहेगा
कन्या राशि
कन्या राशि के स्वामी भगवान बुद्ध है एवं यह राशि भूमि तत्व प्रदान राशि है भूमि तत्व प्रदान राशि होने के कारण इस राशि के जातकों के लिए मां भगवती सरस्वती देवी और महागौरी का पूजन अर्चन करना श्रेष्ठ एवं उत्तम फलदाई रहेगा
तुला राशि
तुला राशि स्वामी दैत्य गुरु शुक्र है और यह राशि वायु तत्व प्रदान राशि है वायु तत्व प्रदान राशि होने के कारण इस राशि के जातकों के लिए महालक्ष्मी स्वरूपा मां भगवती सिद्धिदात्री का पूजन अर्चन करना श्रेष्ठ एवं उत्तम फलदाई रहेगा
वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि के स्वामी भगवान मंगल है और यह राशि जल तत्व प्रदान राशि है जल तत्व प्रदान राशि होने के कारण इस राशि के जातकों के लिए मां भगवती महासरस्वती या मां ब्रह्मचारिणी देवी का पूजन अर्चन करना श्रेष्ठ एवं उत्तम फलदाई रहेगा
धनु राशि
धनु राशि के स्वामी देवगुरु बृहस्पति है और धनु राशि अग्नि तत्व प्रदान राशि है अग्नि तत्व प्रधान राशि होने के कारण इस राशि के जातकों के लिए मां भगवती महाकाली या मां कालरात्रि देवी का पूजन अर्चन करना श्रेष्ठ एवं उत्तम फलदाई रहेगा
मकर राशि
मकर राशि के स्वामी भगवान शनिदेव है और यह राशि भूमि तत्व प्रदान राशि है भूमि तत्व प्रदान राशि होने के कारण इस राशि के जातकों के लिए महा भगवती महासरस्वती या मां चंद्रघंटा देवी का पूजन अर्चन करना श्रेष्ठ एवं उत्तम फलदाई रहेगा
कन्या राशि के स्वामी भगवान बुद्ध है एवं यह राशि भूमि तत्व प्रदान राशि है भूमि तत्व प्रदान राशि होने के कारण इस राशि के जातकों के लिए मां भगवती सरस्वती देवी और महागौरी का पूजन अर्चन करना श्रेष्ठ एवं उत्तम फलदाई रहेगा
तुला राशि
तुला राशि स्वामी दैत्य गुरु शुक्र है और यह राशि वायु तत्व प्रदान राशि है वायु तत्व प्रदान राशि होने के कारण इस राशि के जातकों के लिए महालक्ष्मी स्वरूपा मां भगवती सिद्धिदात्री का पूजन अर्चन करना श्रेष्ठ एवं उत्तम फलदाई रहेगा
वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि के स्वामी भगवान मंगल है और यह राशि जल तत्व प्रदान राशि है जल तत्व प्रदान राशि होने के कारण इस राशि के जातकों के लिए मां भगवती महासरस्वती या मां ब्रह्मचारिणी देवी का पूजन अर्चन करना श्रेष्ठ एवं उत्तम फलदाई रहेगा
धनु राशि
धनु राशि के स्वामी देवगुरु बृहस्पति है और धनु राशि अग्नि तत्व प्रदान राशि है अग्नि तत्व प्रधान राशि होने के कारण इस राशि के जातकों के लिए मां भगवती महाकाली या मां कालरात्रि देवी का पूजन अर्चन करना श्रेष्ठ एवं उत्तम फलदाई रहेगा
मकर राशि
मकर राशि के स्वामी भगवान शनिदेव है और यह राशि भूमि तत्व प्रदान राशि है भूमि तत्व प्रदान राशि होने के कारण इस राशि के जातकों के लिए महा भगवती महासरस्वती या मां चंद्रघंटा देवी का पूजन अर्चन करना श्रेष्ठ एवं उत्तम फलदाई रहेगा
कुंभ राशि
कुंभ राशि के स्वामी भगवान श्री शनिदेव है और यह राशि वायु तत्व प्रधान राशि है वायु तत्व प्रदान राशि होने के कारण इस राशि के जातकों के लिए मां भगवती महालक्ष्मी या मां कुष्मांडा देवी का पूजन अर्चन करना श्रेष्ठ एवं उत्तम फलदाई रहेगा
मीन राशि
मीन राशि के स्वामी देवगुरु बृहस्पति है और यह राशि जल तत्व प्रदान राशि है जल तत्व प्रदान राशि होने के कारण इस राशि के जातकों के लिए मां भगवती शैलपुत्री या मां भगवती सिद्धिदात्री देवी का पूजन अर्चन करना श्रेष्ठ एवं उत्तम फलदाई रहेगा
Wednesday, 14 March 2018
Maniband rekha bracelet line se jane aap ki vastvik aayu
मणिबंध रेखा से जाने आपकी वास्तविक उम्र
bracelet line
हमारी कलाई पर स्थित रेखाओं को मणिबंध रेखा कहते हैं अर्थात हमारी हथेली जिस स्थान से प्रारंभ होती है वहां स्थित ऑडी रेखाओं को मणिबंध रेखा कहा जाता है हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार मणिबंध देख कर व्यक्ति की संभावित उम्र का पता किया जा सकता है
मणिबंध रेखाओं की संख्या सभी के हाथों में अलग-अलग होती है किसी के हाथ में एक तो किसी के हाथ में दो या किसी के हाथ में 3 या किसी के हाथ में चार कितनी भी रेखाएं हो सकती है
नोट मुख्यतः मणिबंध रेखाएं तीन ही शुभ मानी गई है
यदि मणिबंध पर एक ही रेखा हो तो उम्र कम होती है अर्थात 23 से 28 वर्ष ही होती है यदि रेखाओं पर अन्य लक्षण अशुभ हो तो आयु में कमी हो सकती है
यदि शुभ लक्षण युक्त दो मणिबंध रेखाएं किसी जातक के हाथ में होती है तो उस जातक की उम्र 45 से 55 वर्ष हिमानी चाहिए और यदि इन पर अशुभ लक्षण हो तो उम्र में भी कमी आने की संभावना होती है
3 मणिबंध रेखाएं
यदि किसी जातक के हाथ में तीन मणिबंध रेखाएं हो और रेखाओं पर अन्य भी लक्षण शुभ हो तो ऐसे जातकों की उम्र 68 से 85 वर्ष तक माननी चाहिए और यदि अन्य लक्षण अशुभ हो तो उम्र में कमी आने की संभावनाएं रहती है
यदि किसी जातक के हाथ में तीन मणिबंध रेखाएं हो और रेखाओं पर अन्य भी लक्षण शुभ हो तो ऐसे जातकों की उम्र 68 से 85 वर्ष तक माननी चाहिए और यदि अन्य लक्षण अशुभ हो तो उम्र में कमी आने की संभावनाएं रहती है
4 मणिबंध रेखाएं
यदि मणिबंध पर शुभ लक्षण युक्त 4 रेखाएं हो तो ऐसे जातकों की उम्र 85 वर्ष से 100 वर्ष तक की माननी चाहिए और यदि रेखाओं पर अन्य लक्षण अशुभ हो तो उम्र में कमी आने की संभावना होती है
यदि मणिबंध पर शुभ लक्षण युक्त 4 रेखाएं हो तो ऐसे जातकों की उम्र 85 वर्ष से 100 वर्ष तक की माननी चाहिए और यदि रेखाओं पर अन्य लक्षण अशुभ हो तो उम्र में कमी आने की संभावना होती है
शुभ और अशुभ लक्षण
शुभ लक्षण
1.यव अर्थात जो या द्वीप युक्त रेखा
2.त्रिभुज युक्त मणिबंध रेखा
3.स्पष्ट एवं सुंदर मणिबंध रेखा
4.सुंदर कलाई अर्थात कलाई की हड्डी नहीं दिखती हो
2.त्रिभुज युक्त मणिबंध रेखा
3.स्पष्ट एवं सुंदर मणिबंध रेखा
4.सुंदर कलाई अर्थात कलाई की हड्डी नहीं दिखती हो
अशुभ लक्षण
1.टूटी हुई या कटी हुई मणिबंध रेखा
2.अस्पष्ट मणिबंध रेखा
3.लहरदार मणिबंध रेखा
4.कलाई की हड्डी दिखती हो
1.टूटी हुई या कटी हुई मणिबंध रेखा
2.अस्पष्ट मणिबंध रेखा
3.लहरदार मणिबंध रेखा
4.कलाई की हड्डी दिखती हो
Tuesday, 13 March 2018
Vyapar vriddhi ke achuk upay business growing upay
व्यापार वृद्धि के अचूक उपाय
business growing upay
यदि आपका व्यवसाय नया है और गति नहीं पकड़ रहा है तो उस स्थिति में व्यापार वृद्धि और उससे गति प्रदान करने के लिए यह उपाय करें
प्रथम उपाय
एक लाल वस्त्र पर 11 अभिमंत्रित गोमती चक्र तथा उस पर 3 नारियल को रखकर रुद्राक्ष माला से "ऐं क्लीं श्रीं " इस मंत्र की 11 माला का जाप करें तथा उस लाल वस्त्र की एक पोटली बनाने तथा पोटली बनाकर व्यापार स्थान के मुख्य द्वार पर अंदर की ओर ऊंचाई पर लटका दें
दूसरा उपाय
एक पीले वस्त्र में सात अभिमंत्रित गोमती चक्र तथा तीन नारियल तथा एक मोती शंख एवं एक चांदी का सिक्का रख लेवे और "ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं" इस मंत्र का 108 बार जाप करें जाप करते हुए थोड़े-थोड़े साबुत चावल शंख में डालते रहें जब 108 बार जाप हो जाएं तब तक शंख में चावल भर जाने चाहिए इसके पश्चात सारी सामग्री की एक पोटली बनाकर मुख्य द्वार पर टांग देवें
M letar in hand
" M "letar in hand
:-सभी भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं तथा उन चिंताओं के निवारण के लिए ज्योतिष शास्त्र सबसे सरल उपाय है ज्योतिष की अनेकों शाखाएं हैं उनमें से एक शाखा हस्तरेखा है |
:-हस्तरेखा शास्त्र के द्वारा व्यक्ति आसानी से अपना भविष्य जान सकता है|
हस्त में स्थित जीवन रेखा मस्तिष्क रेखा हृदय रेखा एवं भाग्य रेखा से मिलकर बनने वाले अंग्रेजी के अक्षर" M "के बारे में आज हम बात करेंगे
:-यह "M" अक्सर किसी जातक के हाथ में हो तो क्या फल प्रदान करेगा
हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार जिन व्यक्तियों के हाथ में "M" लेटर बनता है वह व्यक्ति भगवान के अधिक करीब होते हैं ऐसे जातकों के भाग्य का फैसला स्वयं भगवान करते हैं|
हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार जिन व्यक्तियों के हाथ में "M" लेटर बनता है वह व्यक्ति भगवान के अधिक करीब होते हैं ऐसे जातकों के भाग्य का फैसला स्वयं भगवान करते हैं|
:-इन्हें काफी हद तक अध्यक्ष व्यक्ति माना जाता है यह व्यक्ति निडर स्वभाव के होते हैं तथा दिल के सच्चे और अच्छे होते हैं इनकी भगवान में अधिक आस्था होती है|
:-यह व्यक्ति बुद्धिमान तथा ईमानदार व्यक्तित्व के धनी होते हैं
चारों रेखा हृदय रेखा जीवन रेखा मस्तिष्क रेखा तथा भाग्य रेखा सरल स्पष्ट एवं सुदृढ़ हो तो ऐसे जातक राजाओं के समान ठाट-बाट करने वाले होते हैं तथा यह निसंदेह करोड़पति होते हैं |
:-यह जिस कार्य को करने की सोच ले उस कार्य को हर हाल में पूर्ण करके मानते हैं चाय सभी उस कार्य के खिलाफ ही क्यों नहीं हो
:-यदि हम लेटर जिस जातक के हाथ में हो वह निजी बिजनेस मैं किसी का पाटन भी बनता है तो बिजनेस में बहुत अच्छा लाभ प्राप्त होता है
यदि है जातक किसी किसी के दोस्त भी बनते हैं तो दोस्ती को ईमानदारी से निभाते हैं |
:-यदि पति पत्नी दोनों के हाथ में एम लेटर बन रहा हो तो वह कपल भाग्यशाली कपल होता है वह जोड़ी आदर्श जोड़ी कहलाती है इन में अटूट प्रेम होता है यह कभी भी एक दूसरे को धोखा नहीं देते हैं इनमें सामंजस्य अच्छा होता है सामंजस्य अच्छा होने के कारण इनका रिश्ता अटूट होता है|
:-M लेटर वाले लोग किसी और के लिए भी भगवान से प्रार्थना करें तो भगवान प्रार्थना बहुत जल्द पूरा करता है | इनको हर बात का आभास जल्दी हो जाता है ,यह एक छोटे से संकेत मात्र से ही हर बात को समझ जाते हैं |
:-यह जातक अच्छे लीडर भी साबित होते हैं इन जातकों की लेखन में बहुत अच्छी रुचि होती है यदि यह शिक्षण क्षेत्र में भी जाते हैं तो बहुत अच्छे शिक्षक बनते हैं शिक्षण कथा लेखन क्षेत्र मैं भी अच्छा नाम अर्जित करते हैं
* "आप लोगों को यह जानकारी अच्छी लगी हो तो मेरे पेज को like कीजिए तथा share कीजिए "
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Monday, 12 March 2018
HRIDAY REKHA PAR TRISUL TRIDENTN on heart line
ह्रदय रेखा पर त्रिशूल
TRIDENT ON HEART LINE
हम अपनी हथेली को यह भी ठीक से देखें तो हथेली में बहुत सी रेखाएं बनी होती है और रेखाओं से मिलकर हमारे हाथ में कुछ आकृतियां भी बनती है तो हमें जो हमें शुभ तथा अशुभ फल प्रदान करती हैं
कुछ आकृतियां शुभ फल प्रदान करती हैं तथा कुछ आकृतियां अशुभ फल प्रदान करती है
हम हमारे हाथ में भाग्य रेखा जीवन रेखा ह्रदय रेखा विवाह रेखा आदि देखने तक ही सीमित रह जाते हैं
बहुत कम लोगों को ज्ञात होता है कि अन्य चिन्ह भी अपना शुभ या अशुभ फल प्रदान करते हैं
तो आज हम बात करेंगे एक ऐसे चिन्ह के बारे में जिसे शिव का अस्त्र कहा जाता है यदि वह चिन्ह किसी जातक के हाथ में होता है उसे क्या फल प्रदान करेगा त्रिशूल भगवान शिव का अस्त्र होता है और ऐसा चिन्ह यदि किसी जातक के हाथ में हृदय रेखा पर देखने को मिलता है तो वह उसे क्या फल प्रदान करेगा
शनि पर्वत पर त्रिशूल का चिन्ह
अगर यह चिन्ह शनि क्षेत्र के पास शुरू होकर खत्म होता है तो ऐसे जातक जन्म से ही संपन्न परिवार में जन्म लेते हैं ऐसे जातकों को अपने जीवन में किसी भी प्रकार की वस्तु की कमी नहीं होती है इनका जीवन सुखमय रहता है
शनि व गुरु पर्वत
यदि त्रिशूल का चिन्ह शनि व गुरु पर्वत के मध्य हो तो ऐसे जातक स्वयं के परिश्रम से धन प्राप्त करते हैं तथा साथ ही साथ इनको विरासत में भी बहुत साधन मिलता है किंतु इतना धन होने के बावजूद भी इन जातकों को सुख कम ही प्राप्त होता है यह उस धनका नहीं तो स्वयं के लिए उपयोग कर पाते हैं नहीं परहित के लिए या दान के लिए कर पाते हैं
गुरु पर्वत पर त्रिशूल का चिन्ह
यदि गुरु पर्वत पर त्रिशूल का चिन्ह हो तो जिन जातकों के गुरु पर्वत पर त्रिशूल का चिन्ह होता है
वह जातक पराक्रमी होते हैं धन तथा ऐश्वर्य से संपन्न होते हैं इनके पास प्रॉपर्टी बहुत मात्रा में होती है इनके पास अपने स्वयं के वाहन भी बहुत होते हैं यह अपना जीवन ऐशो-आराम से बिताते हैं कहा जाए तो इनके पास जीवन में सभी प्रकार भौतिक सुख प्रदान करने वाली वस्तुएं होती है
Saturday, 10 March 2018
Navratri me kare ye upay hogi dhan varsa
NAVRATRI ME KARE YE UPAY HOGI DHAN LAKMI PRAPT
Tulsi ka podha ghar lane se laksmi prapti
नवरात्रि में शुभ मुहूर्त के तुलसी के पौधे को घर लाकर गमले में लगाले है । सुबह शाम इस पौधे के पास घी का दीपक जलाएं तथा जल से चढायें तथा विधि विधानपूर्वक पूजा करें इससे महालक्ष्मी की कृपा होती है । तथा धन धान्य की वृद्धि होती है और परिवार संबंधित सभी विपत्तियोंं समस्याओं का समाधान होता है
Kele podha ghar lane se laksmi prapti
नवरात्रि में शुभ मुहूर्त में केले के पौधे को घर लाएं तथा गमले में लगाए हैं इसकी जड़ में 9 दिनों तक जल चढ़ाएं ।
जल व दूध चढ़ाने से धन धान्य की प्राप्ति होगी तथा परिवार में सुख समृद्धि आएगी।
Sankh puspi ki jad se laksmi prapti
नवरात्रि में शंखपुष्पी की जड़ ला कर उस की पूजा करके लाल वस्त्र में लपेटकर चांदी की डिब्बी में रखकर अलमारी या तिजोरी में रखने से कैसे संबंधित सभी समस्याएं दूर हो जाती है
Harsringar ke pusp se laksmi prapti
शुभ मुहूर्त में हार श्रृंगार के गुच्छ बांदे को लाल कपड़े में लपेटकर के तिजोरी में रखदे ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा होती है तथा धन से संबंधित सभी समस्याएं दूर होती है और धीरे-धीरे सुख समृद्धि का विकास होता है
Friday, 9 March 2018
Mangal rekha the line of mars{ mangalmay jivan ka aashirvad} - palmistry
The line of mars - palmistry
मंगल रेखा मंगलमय जीवन का आशीर्वाद
मंगल रेखा को जीवन रेखा की सहायक रेखा भी कहते हैं ।यह मंगल पर्वत से निकलकर आयु रेखा के समानांतर शुक्र क्षेत्र पर पहुंचती है ।
यह आयु रेखा के दोषों का समन करती है और आयु रेखा को बल प्रदान करती है। यह रेखा जीवन जीने की शक्ति का परिचायक है । अर्थात जीवन जीने की लालसा बढ़ाती है । यह जीवन से हार नहीं मानने देती है। संघर्ष करना सिखाती है,
जिनके हाथ में यह रेखा होती है वह साहसी प्रकृति के होते हैं ।शरीर से बलशाली होते हैं, मानसिक शक्ति माइंड पावर इनका बहुत अच्छा होता है।
यह व्यक्ति को हर विपरीत परिस्थिति मैं डट कर खड़ा रहना सिखाती है । यह व्यक्ति को हर परिस्थिति में लड़कर जीतना सिखाती है।
यह व्यक्ति धैर्यशाली होते हैं । परिश्रमी होते हैं, कार्य करने में उत्साह ही होते हैं।
इनमें संपूर्ण जीवन जीने की लालसा होती है । अगर आयु रेखा में कोई दोस्त हो तो उन दोस्तों का शमन करती है । उस दोस्त की कमियों को दूर करती है।
इनमें संपूर्ण जीवन जीने की लालसा होती है । अगर आयु रेखा में कोई दोस्त हो तो उन दोस्तों का शमन करती है । उस दोस्त की कमियों को दूर करती है।
दोष क्या-क्या हैं ?
रेखा कटी फटी होना रेखा पर द्वीप होना रेखा का स्पष्ट होना रेखा पर कोई अशुभ चिन्ह होना।
यदि दोनों रेखाएं सुंदर वह स्पष्ट हो तो ऐसे व्यक्ति जीवन पर्यंत जीवन जीने के लिए आत्म बल सुदृढ़ रखते हैं । इनका जीवन जीने के प्रति पॉजिटिव नजरिया होता है ।ऐसे व्यक्तियों से नकारात्मक शक्तियां दूर रहती है।
आयु रेखा से दूर मंगल रेखा
यदि मंगल रेखा जीवन रेखा से दूर शुक्र पर्वत से होकर गुजरती हो तो यह व्यक्ति लापरवाह होते हैं । उग्र स्वभाव के होते हैं तथा इन व्यक्तियों में प्रतिशोध की भावना भरी रहती है। यह व्यक्ति छोटी-छोटी बातों पर ही झगड़ने लगते हैं।
आयु रेखा के पास मंगल रेखा
यदि मंगल रेखा आयु रेखा के पास से होकर जाती है। तो ऐसे जातक आत्म शक्ति आत्म बल युक्त होते हैं ।इनका आत्म बल प्रबल होने के कारण ही यह हर परिस्थिति का डटकर सामना करते हैं । यह व्यक्ति शारीरिक रूप से स्वस्थ होते हैं । समाज में सम्मानित होते हैं प्रतिष्ठित होते हैं ।
मंगल रेखा से ऊपर की तरफ जाने वाली रेखाएं
यदि मंगल रेखा से निकलकर रेखाएं ऊपर की तरफ जाती है ।ऐसे व्यक्ति अपने जीवन में अपने कार्य क्षेत्र में सफलताएं प्राप्त करते हैं ।
मंगल रेखा से निकली आड़ी रेखाएं
यदि मंगल रेखा से निकल कर कुछ आड़ी रेखाएं मस्तिष्क रेखा को काटती हो तो ऐसे जातकों को सिर पर चोट लगने का भय रहता है तथा मानसिक तनाव भी रहता है ।ऐसे जातकों के प्रेम संबंध भी असफल रहते हैं ।और यदि मंगल रेखा पर बिंदु का चिन्ह हो तो ऐसे जातकों को दुर्घटना का भय बना रहता है ऐसे जातकों का दुर्घटना होने के योग बनते हैं ।
Thursday, 8 March 2018
Manibandh aur Rajyog ( BRACELET LINE ) मणिबंध रेखा और राजयोग
Manibandh aur Rajyog ( BRACELET LINE )
मणिबंध रेखाऔर राजयोग
कलाई पर हथेली की तरफ बनी हुई रेखाओं को मणिबंध रेखा कहते हैं ।इनका हस्तरेखा ज्योतिष में बहुत महत्व है ।इन्हें नजरअंदाज करना अपूर्ण अर्थात आधा भविष्यफल कहने के बराबर है।
एक मणिबंध रेखा
यदि किसी जातक की कलाई को स्पष्ट यव अर्थात द्वीप युक्त मणिबंध रेखा हो पूर्ण कलाई को घेरे हुए हो तो वह व्यक्ति समाज में प्रतिष्ठा मान-सम्मान तथा अत्यधिक रूप में धन प्राप्त करता है। रेखा सुन्दर स्पष्ट बिना कटी होनि चाहिए।
दो मणिबंध रेखाएं
यदि दो मणिबंध रेखा सुंदर स्पष्ट हो द्वीपीय युक्त हो तथा संपूर्ण कलाई को घेरे हुए हो तो ऐसे जातक विद्वान होते हैं ।अनेकों प्रतिभा इनके अंदर होती है प्रतिभा होने के साथ-साथ यह बहुत अच्छे समाज सुधारक होते हैं। ऐसी सुंदर रेखा होने पर ऐसे जातक सलाहकार बनते हैं। समाज सुधारक बनते हैं ।उच्च राज्य अधिकारी बनते हैं ।एवं प्रशासनिक सेवाओं में होते हैं।
तीन मणिबंध रेखाएं
यदि सुंदर स्पष्ट द्वीप युक्तियुक्त तीन मणिबंध रेखाएं हो जो संपूर्ण कलाई को घेरे हुए हो तो ऐसे व्यक्ति सभी प्रकार के भौतिक सुख प्राप्त करते हैं ।यदि और भी इनके हाथ में शुभ लक्षण हो तो जातकों के भाग्य में राजयोग होता है । इनका जीवन राजा या राजा अतुल्य होता है , ऐसे व्यक्ति बड़े मंत्री पद पर आसीन होते हैं।
यदि तीन मणिबंध रेखाएं सुन्दर स्पष्ट द्वीप युक्त हो तथा संपूर्ण कलाई को घेरे हुए हो तो ऐसे व्यक्ति देश और विदेश में दोनों ही स्थान पर राज करते हैं।
Tuesday, 6 March 2018
Navratra puja vidhi For House & office thatha kalas sthapana
Navratra puja vidhi For house&o office thatha kalas sthapana
नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्र में कलश स्थापना करके पूजन करने का बहुत अधिक महत्व है नवरात्रि में प्रतिपदा को कलश स्थापना की जाती है ।
तथा नवमी को विसर्जन किया जाता है, सभी भक्तों अपनी-अपनी मनोकामना सिद्धि के लिए घर तथा कारोबार में सुख समृद्धि धन धान्य ऐश्वर्य आदि की प्राप्ति के लिए नवरात्र में श्रद्धा पूर्वक मां दुर्गा का पूजन अर्चन करते हैं ।
तथा मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करते हैं
तथा नवमी को विसर्जन किया जाता है, सभी भक्तों अपनी-अपनी मनोकामना सिद्धि के लिए घर तथा कारोबार में सुख समृद्धि धन धान्य ऐश्वर्य आदि की प्राप्ति के लिए नवरात्र में श्रद्धा पूर्वक मां दुर्गा का पूजन अर्चन करते हैं ।
तथा मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करते हैं
कलश स्थापना के लिए आवश्यक सामग्री
1.एक मिट्टी का कलश
2.एक मिट्टी का पात्र
3.मिट्टी की सराय वह दीपक
4.शुद्ध साफ की हुई मिट्टी जिसमें पत्थर कंकर आदि नहीं हो
5.मौली या कलावा
6.रोली
7.इलायची
8.चांदी का सिक्का
9रुई माचिस
10.मां दुर्गा का चित्र या मूर्ति
2.एक मिट्टी का पात्र
3.मिट्टी की सराय वह दीपक
4.शुद्ध साफ की हुई मिट्टी जिसमें पत्थर कंकर आदि नहीं हो
5.मौली या कलावा
6.रोली
7.इलायची
8.चांदी का सिक्का
9रुई माचिस
10.मां दुर्गा का चित्र या मूर्ति
11.अशोक या आम के पत्ते
12.कलश को ढकने के लिए मिट्टी का ढक्कन
13 .साबुत चावल
14. एक पानी का नारियल
15.साबुत सुपारी
16.कलश में रखने के लिए सिक्के
17.लाल या पीला कपड़ा
18.एक माताजी की चुनरी
19.मिठाई
20.लाल गुलाब के फूलों की माला
21. एक चौकी
12.कलश को ढकने के लिए मिट्टी का ढक्कन
13 .साबुत चावल
14. एक पानी का नारियल
15.साबुत सुपारी
16.कलश में रखने के लिए सिक्के
17.लाल या पीला कपड़ा
18.एक माताजी की चुनरी
19.मिठाई
20.लाल गुलाब के फूलों की माला
21. एक चौकी
तो आइए जानते हैं कलश स्थापना किस प्रकार की जाए
1.:-कलश स्थापना के लिए साधक को स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करनी चाहिए वह वस्त्र लाल या पीले हो तो बहुत ही शुभ होंगे।
2.:-तथा इसके पश्चात मंदिर या घर या फैक्ट्री मैं जहां भी साधक नवरात्रि कलश स्थापना करता है ।वहां पूर्व दिशा में या ईशान कोण में लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र या पीला वस्त्र बिछाकर उसके ऊपर मां दुर्गा का चित्र या मूर्ति स्थापित करना चाहिए।
3:-.तथा फिर जौ बोनेे के लिए एक मिट्टी के पात्र में स्वच्छ मिट्टी भरकर उसमें जौ डालकर उसे हल्का सा मिलाकर पानी का छिड़काव कर दें।
4:-फिर उस पर मिट्टी का कलश स्थापित कर दें कलश में गंगाजल या गंगा जल मिश्रित जल भरदे तथा फिर कलश में रोली थोड़ा सा मीठा एक चांदी का सिक्का थोड़े से चावल डाल दे।
5:-फिर उस पर आम के पत्ते या अशोक के पत्ते लगाकर ढक्कन से ढक दें ढक्कन में चावल भर दे तथा फिर एक नारियल ले नारियल पर लाल कपड़ा या कलावा लपेटकर कलश पर रख दें तथा कलश के भी कलावा बांधने कलश पर स्वास्तिक बना दे।
6:-कलश पर रखे जाने वाले नारियल का मुंह आपकी तरफ होना चाहिए तथा नौक वाला हिस्सा दूसरी तरफ होना चाहिए।
7:-नारियल का मुंह नीचे की तरफ रखने से शत्रु वृद्धि होती है ।तथा ऊपर की तरफ रखने से रोग बढ़ते हैं ।तथा पूर्व की ओर रखने से धन हानि होती है । अतः नारियल का मुख साधक की तरफ ही होना चाहिए
8:-इसके पश्चात दीपक प्रज्वलित करें दीपक 9 दिन तक अखंड भी रख सकते हैं ।साधक या फिर अपनी सुविधा के अनुसार भी रख सकते हैं ।वैसे तो नवरात्रि में अखंड दीपक ही रखना चाहिए ।
9:-इसके पश्चात कलश में असंख्यात रूद्र देवताओं का आवाहन करना चाहिए तथा भगवान गणेश जी रिद्धि सिद्धि शुभ लाभ षोडश मातृका सप्तघृत मातृका नवग्रह देवता कुल पितृ देवता ब्रह्मा जी पंच लोकपाल देवता कुलदेवी कुलदेवता तथा आपके इष्ट का स्मरण करें उनका पूजन करें उनका आवाहन करें तत्पश्चात मां दुर्गा का आवाहन करें उनसे प्रार्थना करें कि हे मां दुर्गा आइए आप हमारे यहां करें विराजमान हुई है और हमारे पर कृपा करें
10:-आवाहन करने के पश्चात मां दुर्गा के चित्र या मूर्ति को स्नान कराएं वस्त्र वस्त्र अर्पण करें रोली का तिलक करें अक्षत तथा चित्र या मूर्ति को गुलाब की माला अर्पण करें तथा मिठाई का पंचमेवा का भोग लगाएं लौंग इलायची आदि चढ़ाएं तथा मां को अनार का फल का भोग लगाएं
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11:-भोग लगाने के पश्चात फिर आरती करें यह कार्य नव दिवस तक रोज करें तथा नौवें दिन नौ कन्या तथा एक बालक को भोजन कराकर कलश का जल घर में छिड़क दें तथा कुछ उगे हुए जौ को तिजोरी मे रखले
तथा अन्य को जल मैं विसर्जन करदें।
तथा अन्य को जल मैं विसर्जन करदें।
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