Thursday, 15 March 2018

Rashi ke anusar navratri me ma navdurga ka pujan

राशि के अनुसार नवरात्रि में मां नवदुर्गा का पूजन

durga puja

चैत्र नवरात्रि मैं यदि इस विधि के अनुसार मां दुर्गा का पूजन करेंगे तो मां दुर्गा शीघ्र आप पर प्रसन्न होगी और अपनी कृपा दृष्टि आप पर शीघ्र बनाएगी यदि राशि के अनुसार मां दुर्गा का पूजन करें जिस जातक की जो राशि हो वर्ष राशि प्रदान देवी का पूजन करें तो वह देवी आप पर शीघ्र प्रसन्न होकर आपको शुभ फल प्रदान करती है
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आदिवासी के अनुसार मां भगवती दुर्गा की पूजा के बारे में जानेंगे किस राशि वाले जातक को किस प्रकार से किस देवी की पूजा करने पर शेषफल प्राप्त होगा भाई आप जानते हैं राशि के अनुसार पूजा विधि

मेष राशि मेष राशि का स्वामी मंगल है और यह राशि अग्नि तत्व प्रधान राशि है अग्नि तत्व प्रधान  होने के कारण इस राशि के जातकों के लिए मां भगवती महाकाली एवं महाकाली स्वरूपिणी कालरात्रि देवी का पूजन करना श्रेष्ठ एवं उत्तम फलदाई होगा
वृषभ राशि
वृषभ राशि का स्वामी दैत्य गुरु शुक्र है और यह राशि भूमि तत्व प्रदान है भूमि तत्व प्रदान राशि होने के कारण इस राशि के जातकों के लिए मां भगवती महासरस्वती एवं मां चंद्रघंटा देवी का पूजन करना श्रेष्ठ एवं उत्तम फलदाई रहेगा


मिथुन राशि


मिथुन राशि का स्वामी बुध है और यह वायु तत्व प्रधान राशि है वायु तत्व प्रधान होने के कारण मिथुन राशि के जातकों के लिए मां भगवती महालक्ष्मी स्वरूपिणी मां कुष्मांडा देवी का पूजन अर्चन करना श्रेष्ठ एवं उत्तम फलदाई रहेगा

कर्क राशि


कर्क राशि के स्वामी भगवान चंद्र देव है एवं यह जल तत्व प्रदान राशि है जल  तत्व प्रदान राशि होने के कारण इस राशि के जातकों के लिए मां भगवती महासरस्वती एवं मां ब्रह्मचारिणी का पूजन करना श्रेष्ठ एवं उत्तम फलदाई रहेगा



सिंह राशि


सिंह राशि के स्वामी भगवान श्री सूर्य देव है और यह राशि अग्नि तत्व प्रदान राशि है अग्नि तत्व प्रदान राशि होने के कारण इस राशि के जातकों के लिए मां भगवती महालक्ष्मी अथवा मां कात्यायनी देवी का पूजा करना श्रेष्ठ एवं उत्तम फलदाई रहेगा



कन्या राशि

कन्या राशि के स्वामी भगवान बुद्ध है एवं यह राशि भूमि तत्व प्रदान राशि है भूमि तत्व प्रदान राशि होने के कारण इस राशि के जातकों के लिए मां भगवती सरस्वती देवी और महागौरी का पूजन अर्चन करना श्रेष्ठ एवं उत्तम फलदाई रहेगा


तुला राशि 

तुला राशि स्वामी दैत्य गुरु शुक्र है और यह राशि वायु तत्व प्रदान राशि है वायु तत्व प्रदान राशि होने के कारण इस राशि के जातकों के लिए महालक्ष्मी स्वरूपा मां भगवती सिद्धिदात्री का पूजन अर्चन करना श्रेष्ठ एवं उत्तम फलदाई रहेगा

वृश्चिक राशि


वृश्चिक राशि के स्वामी भगवान मंगल है और यह राशि जल तत्व प्रदान राशि है जल तत्व प्रदान राशि होने के कारण इस राशि के जातकों के लिए मां भगवती महासरस्वती या मां ब्रह्मचारिणी देवी का पूजन अर्चन करना श्रेष्ठ एवं उत्तम फलदाई रहेगा


धनु राशि

धनु राशि के स्वामी देवगुरु बृहस्पति है और धनु राशि अग्नि तत्व प्रदान राशि है अग्नि तत्व प्रधान राशि होने के कारण इस राशि के जातकों के लिए मां भगवती महाकाली या मां कालरात्रि देवी का पूजन अर्चन करना श्रेष्ठ एवं उत्तम फलदाई रहेगा


मकर राशि


मकर राशि के स्वामी भगवान शनिदेव है और यह राशि भूमि तत्व प्रदान राशि है भूमि तत्व प्रदान राशि होने के कारण इस राशि के जातकों के लिए महा भगवती महासरस्वती या मां चंद्रघंटा देवी का पूजन अर्चन करना श्रेष्ठ एवं उत्तम फलदाई रहेगा



कुंभ राशि

कुंभ राशि के स्वामी भगवान श्री शनिदेव है और यह राशि वायु तत्व प्रधान राशि है वायु तत्व प्रदान राशि होने के कारण इस राशि के जातकों के लिए मां भगवती महालक्ष्मी या मां कुष्मांडा देवी का पूजन अर्चन करना श्रेष्ठ एवं उत्तम फलदाई रहेगा


मीन राशि

मीन राशि के स्वामी देवगुरु बृहस्पति है और यह राशि जल तत्व प्रदान राशि है जल तत्व प्रदान राशि होने के  कारण इस राशि के जातकों के लिए मां भगवती शैलपुत्री या मां भगवती सिद्धिदात्री देवी का पूजन अर्चन करना श्रेष्ठ एवं उत्तम फलदाई रहेगा

Wednesday, 14 March 2018

Maniband rekha bracelet line se jane aap ki vastvik aayu

मणिबंध रेखा से जाने आपकी वास्तविक उम्र
 bracelet line
मणिबंध रेखा से जाने आपकी वास्तविक उम्र   bracelet line



हमारी कलाई पर स्थित रेखाओं को मणिबंध रेखा कहते हैं अर्थात हमारी हथेली जिस स्थान से प्रारंभ होती है वहां स्थित ऑडी रेखाओं को मणिबंध रेखा कहा जाता है हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार मणिबंध देख कर व्यक्ति की संभावित उम्र का पता किया जा सकता है

मणिबंध रेखाओं की संख्या सभी के हाथों में अलग-अलग होती है किसी के हाथ में एक तो किसी के हाथ में दो या किसी के हाथ में 3 या किसी के हाथ में चार कितनी भी रेखाएं हो सकती है


नोट मुख्यतः मणिबंध रेखाएं तीन ही शुभ मानी गई है

एक मणिबंध रेखा हो तो 
मणिबंध रेखा से जाने आपकी वास्तविक उम्र   bracelet line

यदि मणिबंध पर एक ही रेखा हो तो उम्र कम होती है अर्थात 23 से 28 वर्ष ही होती है यदि रेखाओं पर अन्य लक्षण अशुभ हो तो आयु में कमी हो सकती है

 दो मणिबंध रेखाएं 
मणिबंध रेखा से जाने आपकी वास्तविक उम्र   bracelet line

यदि शुभ लक्षण युक्त दो मणिबंध रेखाएं किसी जातक के हाथ में होती है तो उस जातक की उम्र 45 से 55 वर्ष हिमानी चाहिए और यदि इन पर अशुभ लक्षण हो तो उम्र में भी कमी आने की संभावना होती है

    3 मणिबंध रेखाएं
 

मणिबंध रेखा से जाने आपकी वास्तविक उम्र   bracelet line
यदि किसी जातक के हाथ में तीन मणिबंध रेखाएं हो और रेखाओं पर अन्य भी लक्षण शुभ हो तो ऐसे जातकों की उम्र 68 से 85 वर्ष तक माननी चाहिए और यदि अन्य लक्षण अशुभ हो तो उम्र में कमी आने की संभावनाएं रहती है

 4 मणिबंध रेखाएं
 

मणिबंध रेखा से जाने आपकी वास्तविक उम्र   bracelet line
 यदि मणिबंध पर शुभ लक्षण युक्त 4 रेखाएं हो तो ऐसे जातकों की उम्र 85 वर्ष से 100 वर्ष तक की माननी चाहिए और यदि रेखाओं पर अन्य लक्षण अशुभ हो तो उम्र में कमी आने की संभावना होती है

शुभ और अशुभ लक्षण



शुभ लक्षण
 
1.यव अर्थात जो या द्वीप  युक्त रेखा
2.त्रिभुज युक्त मणिबंध रेखा
3.स्पष्ट एवं सुंदर मणिबंध रेखा
4.सुंदर कलाई अर्थात कलाई की हड्डी नहीं दिखती हो

 अशुभ लक्षण
1.टूटी हुई या कटी हुई मणिबंध रेखा
2.अस्पष्ट मणिबंध रेखा
3.लहरदार मणिबंध रेखा
4.कलाई की हड्डी दिखती हो

Tuesday, 13 March 2018

Vyapar vriddhi ke achuk upay business growing upay


व्यापार वृद्धि के अचूक उपाय 

business growing upay


Money

यदि आपका व्यवसाय नया है और गति नहीं पकड़ रहा है तो उस स्थिति में व्यापार वृद्धि और उससे गति प्रदान करने के लिए यह उपाय करें



 प्रथम उपाय
Business growing tips

एक लाल वस्त्र पर 11 अभिमंत्रित गोमती चक्र तथा उस पर 3 नारियल को रखकर रुद्राक्ष माला से "ऐं क्लीं श्रीं " इस मंत्र की 11 माला का जाप करें तथा उस लाल वस्त्र की एक पोटली बनाने तथा पोटली बनाकर व्यापार स्थान के मुख्य द्वार पर अंदर की ओर ऊंचाई पर लटका दें





दूसरा उपाय

Vyapar-vriddhi-ke-achuk upay


एक पीले वस्त्र में सात अभिमंत्रित गोमती चक्र तथा तीन नारियल तथा एक मोती शंख एवं एक चांदी का सिक्का रख लेवे और "ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं" इस मंत्र का 108 बार जाप करें जाप करते हुए थोड़े-थोड़े साबुत चावल शंख में डालते रहें जब 108 बार जाप हो जाएं तब तक शंख में चावल भर जाने चाहिए इसके पश्चात सारी सामग्री की एक पोटली बनाकर मुख्य द्वार पर टांग देवें

M letar in hand

                                 " M "letar in hand
M hast rekha me

:-सभी भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं तथा उन चिंताओं के निवारण के लिए ज्योतिष शास्त्र सबसे सरल उपाय है ज्योतिष की अनेकों शाखाएं हैं उनमें से एक शाखा हस्तरेखा है |

:-हस्तरेखा शास्त्र के द्वारा व्यक्ति आसानी से अपना भविष्य जान सकता है|
हस्त में स्थित जीवन रेखा मस्तिष्क रेखा हृदय रेखा एवं भाग्य रेखा से मिलकर बनने वाले अंग्रेजी के अक्षर" M "के बारे में आज हम बात करेंगे

:-यह "M" अक्सर किसी जातक के हाथ में हो तो क्या फल प्रदान करेगा
हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार जिन व्यक्तियों के हाथ में "M" लेटर बनता है वह व्यक्ति भगवान के अधिक करीब होते हैं ऐसे जातकों के भाग्य का फैसला स्वयं भगवान करते हैं|

:-इन्हें काफी हद तक अध्यक्ष व्यक्ति माना जाता है यह व्यक्ति निडर स्वभाव के होते हैं तथा दिल के सच्चे और अच्छे होते हैं इनकी भगवान में अधिक आस्था होती है|



:-यह व्यक्ति बुद्धिमान तथा ईमानदार व्यक्तित्व के धनी होते हैं
चारों रेखा हृदय रेखा जीवन रेखा मस्तिष्क रेखा तथा भाग्य रेखा सरल स्पष्ट एवं सुदृढ़ हो तो ऐसे जातक राजाओं के समान ठाट-बाट करने वाले होते हैं तथा यह निसंदेह करोड़पति होते हैं |

:-यह जिस कार्य को करने की सोच ले उस कार्य को हर हाल में पूर्ण करके मानते हैं चाय सभी उस कार्य के खिलाफ ही क्यों नहीं हो 

:-यदि हम लेटर जिस जातक के हाथ में हो वह निजी बिजनेस मैं किसी का पाटन भी बनता है तो बिजनेस में बहुत अच्छा लाभ प्राप्त होता है
यदि है जातक किसी किसी के दोस्त भी बनते हैं तो दोस्ती को ईमानदारी से निभाते हैं |

:-यदि पति पत्नी दोनों के हाथ में एम लेटर बन रहा हो तो वह कपल भाग्यशाली कपल होता है वह जोड़ी आदर्श जोड़ी कहलाती है इन में अटूट प्रेम होता है यह कभी भी एक दूसरे को धोखा नहीं देते हैं इनमें सामंजस्य अच्छा होता है सामंजस्य अच्छा होने के कारण इनका रिश्ता अटूट होता है|

:-M लेटर वाले लोग किसी और के लिए भी भगवान से प्रार्थना करें तो भगवान प्रार्थना बहुत जल्द पूरा करता है | इनको हर बात का आभास जल्दी हो जाता है ,यह एक छोटे से संकेत मात्र से ही हर बात को समझ जाते हैं |

:-यह जातक अच्छे लीडर भी साबित होते हैं इन जातकों की लेखन में बहुत अच्छी रुचि होती है यदि यह शिक्षण क्षेत्र में भी जाते हैं तो बहुत अच्छे शिक्षक बनते हैं शिक्षण कथा लेखन क्षेत्र मैं भी अच्छा नाम अर्जित करते हैं




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Monday, 12 March 2018

HRIDAY REKHA PAR TRISUL TRIDENTN on heart line



ह्रदय रेखा पर त्रिशूल 
TRIDENT ON HEART LINE

Hriday-rekha-par-trikon-trident

हम अपनी हथेली को यह भी ठीक से देखें तो हथेली में बहुत सी रेखाएं बनी होती है और रेखाओं से मिलकर हमारे हाथ में कुछ आकृतियां भी बनती है तो हमें जो हमें शुभ तथा अशुभ फल प्रदान करती हैं 

कुछ आकृतियां शुभ फल प्रदान करती हैं तथा कुछ आकृतियां अशुभ फल प्रदान करती है
हम हमारे हाथ में भाग्य रेखा जीवन रेखा ह्रदय रेखा विवाह रेखा आदि देखने तक ही सीमित रह जाते हैं
 बहुत कम लोगों को ज्ञात होता है कि अन्य चिन्ह भी अपना शुभ या अशुभ फल प्रदान करते हैं
  
तो आज हम बात करेंगे एक ऐसे चिन्ह के बारे में जिसे शिव का अस्त्र कहा जाता है यदि वह चिन्ह किसी जातक के हाथ में होता है उसे क्या फल प्रदान करेगा त्रिशूल भगवान शिव का अस्त्र होता है और ऐसा चिन्ह यदि किसी जातक के हाथ में हृदय रेखा पर देखने को मिलता है तो वह उसे क्या फल प्रदान करेगा 
उसके बारे में जानते हैं हमारे हाथ हृदय रेखा से तीन रेखाएं निकल रही हो जो त्रिशूल के समान दिखाई देती हो




शनि पर्वत पर त्रिशूल का चिन्ह
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अगर यह चिन्ह शनि क्षेत्र के पास शुरू होकर खत्म होता है तो ऐसे जातक जन्म से ही संपन्न परिवार में जन्म लेते हैं ऐसे जातकों को अपने जीवन में किसी भी प्रकार की वस्तु की कमी नहीं होती है इनका जीवन सुखमय रहता है

शनि  व गुरु पर्वत
Hriday-rekha-par-trikon-trident

यदि त्रिशूल का चिन्ह शनि  व गुरु पर्वत के मध्य हो तो ऐसे जातक स्वयं के परिश्रम से धन प्राप्त करते हैं तथा साथ ही साथ इनको विरासत में भी बहुत साधन मिलता है किंतु इतना धन होने के बावजूद भी इन जातकों को सुख कम ही प्राप्त होता है यह उस धनका नहीं तो स्वयं के लिए उपयोग कर पाते हैं नहीं परहित के लिए या दान के लिए कर पाते हैं 



गुरु पर्वत पर त्रिशूल का चिन्ह 
Trishul hast rekha

यदि गुरु पर्वत पर त्रिशूल का चिन्ह हो तो जिन जातकों के गुरु पर्वत पर त्रिशूल का चिन्ह होता है
वह जातक पराक्रमी होते हैं धन तथा ऐश्वर्य से संपन्न होते हैं इनके पास प्रॉपर्टी बहुत मात्रा में होती है इनके पास अपने स्वयं के वाहन भी बहुत होते हैं यह अपना जीवन ऐशो-आराम से बिताते हैं कहा जाए तो इनके पास जीवन में सभी प्रकार भौतिक सुख प्रदान करने वाली वस्तुएं होती है

Saturday, 10 March 2018

Navratri me kare ye upay hogi dhan varsa


NAVRATRI ME KARE YE UPAY HOGI DHAN LAKMI PRAPT



Tulsi ka podha ghar lane se laksmi prapti

नवरात्रि में शुभ मुहूर्त के तुलसी के पौधे को घर लाकर गमले में लगाले है । सुबह शाम इस पौधे के पास घी का दीपक जलाएं तथा जल से चढायें तथा  विधि विधानपूर्वक पूजा करें इससे महालक्ष्मी की कृपा होती है । तथा धन धान्य की वृद्धि होती है और परिवार संबंधित सभी विपत्तियोंं समस्याओं का समाधान होता है


Kele podha ghar lane se laksmi prapti

नवरात्रि में शुभ मुहूर्त में केले के पौधे को घर लाएं  तथा गमले में लगाए हैं इसकी जड़ में 9 दिनों तक जल चढ़ाएं ।
जल व दूध चढ़ाने से धन धान्य की प्राप्ति होगी तथा परिवार में सुख समृद्धि आएगी।


 Sankh puspi ki jad se laksmi prapti

नवरात्रि में शंखपुष्पी की जड़ ला कर उस की पूजा करके लाल वस्त्र में लपेटकर चांदी की डिब्बी में रखकर अलमारी या तिजोरी में रखने से कैसे संबंधित सभी समस्याएं दूर हो जाती है


Harsringar ke pusp se laksmi prapti


शुभ मुहूर्त में हार श्रृंगार के गुच्छ बांदे को लाल कपड़े में लपेटकर के तिजोरी में रखदे  ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा होती है तथा धन से संबंधित सभी समस्याएं दूर होती है और धीरे-धीरे सुख समृद्धि का विकास होता है

jivan rekha mastisk rekha hriday rekha ka yog ? shnub ya ashub ( hast re...

Friday, 9 March 2018

Mangal rekha the line of mars{ mangalmay jivan ka aashirvad} - palmistry

             
    The line of mars - palmistry 
            
     मंगल रेखा मंगलमय जीवन का आशीर्वाद

Mars line


मंगल रेखा को जीवन रेखा की सहायक रेखा भी कहते हैं ।यह मंगल पर्वत से निकलकर आयु रेखा के समानांतर शुक्र क्षेत्र पर पहुंचती है ।

यह आयु रेखा के दोषों का समन करती है और आयु रेखा को बल प्रदान करती है। यह रेखा जीवन जीने की शक्ति का परिचायक है । अर्थात जीवन जीने की लालसा बढ़ाती है । यह जीवन से हार नहीं मानने देती है। संघर्ष करना सिखाती है,


जिनके हाथ में यह रेखा होती है वह साहसी प्रकृति के होते हैं ।शरीर से बलशाली होते हैं, मानसिक शक्ति माइंड पावर इनका बहुत अच्छा होता है।


यह व्यक्ति को हर विपरीत परिस्थिति मैं डट कर खड़ा रहना सिखाती है । यह व्यक्ति को हर परिस्थिति में लड़कर जीतना सिखाती है।


यह व्यक्ति धैर्यशाली होते हैं । परिश्रमी होते हैं, कार्य करने में उत्साह ही होते हैं।


इनमें संपूर्ण जीवन जीने की लालसा होती है । अगर आयु रेखा में कोई दोस्त हो तो उन दोस्तों का शमन करती है । उस दोस्त की कमियों को दूर करती है।


दोष  क्या-क्या हैं ?

रेखा कटी फटी होना रेखा पर द्वीप होना रेखा का स्पष्ट होना रेखा पर कोई अशुभ चिन्ह होना। 


यदि दोनों रेखाएं सुंदर वह स्पष्ट हो तो ऐसे व्यक्ति जीवन पर्यंत जीवन जीने के लिए आत्म बल सुदृढ़ रखते हैं । इनका जीवन जीने के प्रति पॉजिटिव नजरिया होता है ।ऐसे व्यक्तियों से नकारात्मक शक्तियां दूर रहती है।


आयु रेखा से दूर मंगल रेखा
Mars line


यदि मंगल रेखा जीवन रेखा से दूर शुक्र पर्वत से होकर गुजरती हो तो यह व्यक्ति लापरवाह होते हैं । उग्र स्वभाव के होते हैं तथा इन व्यक्तियों में प्रतिशोध की भावना भरी रहती है। यह व्यक्ति छोटी-छोटी बातों पर ही झगड़ने लगते हैं।


आयु रेखा के पास मंगल रेखा
Mangalmay jivan

यदि मंगल रेखा आयु रेखा के पास से होकर जाती है। तो ऐसे जातक आत्म शक्ति आत्म बल युक्त होते हैं ।इनका आत्म बल प्रबल होने के कारण ही यह हर परिस्थिति का डटकर सामना करते हैं । यह व्यक्ति शारीरिक रूप से स्वस्थ होते हैं । समाज में सम्मानित होते हैं प्रतिष्ठित होते हैं ।


मंगल रेखा से ऊपर की तरफ जाने वाली रेखाएं
Mars line

यदि मंगल रेखा से निकलकर रेखाएं ऊपर की तरफ जाती है ।ऐसे व्यक्ति अपने जीवन में अपने कार्य क्षेत्र में सफलताएं प्राप्त करते हैं ।


मंगल रेखा से निकली आड़ी रेखाएं

यदि मंगल रेखा से निकल कर कुछ आड़ी रेखाएं मस्तिष्क रेखा को काटती हो तो ऐसे जातकों को सिर पर चोट लगने का भय रहता है तथा मानसिक तनाव भी रहता है ।ऐसे जातकों के प्रेम संबंध भी असफल रहते हैं ।और यदि मंगल रेखा पर बिंदु का चिन्ह हो तो ऐसे जातकों को दुर्घटना का भय बना रहता है ऐसे जातकों का दुर्घटना होने के योग बनते हैं ।

Thursday, 8 March 2018

Manibandh aur Rajyog ( BRACELET LINE ) मणिबंध रेखा और राजयोग

Manibandh aur Rajyog ( BRACELET LINE ) 
                                                
                                   मणिबंध रेखाऔर   राजयोग 


Bracelet line




कलाई पर हथेली की तरफ बनी हुई रेखाओं को मणिबंध रेखा कहते हैं ।इनका हस्तरेखा ज्योतिष में बहुत महत्व है ।इन्हें नजरअंदाज करना अपूर्ण  अर्थात आधा भविष्यफल कहने के बराबर है।



एक मणिबंध रेखा


Manibandh-aur-rajyog-bracelet-lineयदि किसी जातक की कलाई को  स्पष्ट यव अर्थात द्वीप युक्त मणिबंध रेखा हो पूर्ण कलाई को घेरे हुए हो  तो वह व्यक्ति समाज में प्रतिष्ठा मान-सम्मान तथा अत्यधिक रूप में धन प्राप्त करता है। रेखा सुन्दर स्पष्ट बिना कटी होनि चाहिए।


दो मणिबंध रेखाएं

Manibandh-aur-rajyog-bracelet-line
यदि दो मणिबंध रेखा सुंदर स्पष्ट हो द्वीपीय युक्त हो तथा संपूर्ण कलाई को घेरे हुए हो तो ऐसे जातक विद्वान होते हैं ।अनेकों प्रतिभा इनके अंदर होती है प्रतिभा होने के साथ-साथ यह बहुत अच्छे समाज सुधारक होते हैं। ऐसी सुंदर रेखा होने पर ऐसे जातक सलाहकार बनते हैं। समाज सुधारक बनते हैं ।उच्च राज्य अधिकारी बनते हैं ।एवं प्रशासनिक सेवाओं में होते हैं।



तीन मणिबंध रेखाएं

Manibandh-aur-rajyog-bracelet-lineयदि सुंदर स्पष्ट द्वीप युक्तियुक्त तीन मणिबंध रेखाएं हो जो संपूर्ण कलाई को घेरे हुए हो तो ऐसे व्यक्ति सभी प्रकार के भौतिक सुख प्राप्त करते हैं ।यदि और भी इनके हाथ में शुभ लक्षण हो तो जातकों के भाग्य में राजयोग होता है । इनका जीवन राजा या राजा अतुल्य होता है , ऐसे व्यक्ति बड़े मंत्री पद पर आसीन होते हैं।



चार मणिबंध रेखा


Manibandh-aur-rajyog-bracelet-line
यदि तीन मणिबंध रेखाएं सुन्दर स्पष्ट द्वीप युक्त हो तथा संपूर्ण कलाई को घेरे हुए हो तो ऐसे व्यक्ति देश और विदेश में दोनों ही स्थान पर राज करते हैं।

Tuesday, 6 March 2018

अगर आप के हाथ में भी है ये रेखा तो आप की भी लगेगी लोटरी (hast rekha in h...

Navratra puja vidhi For House & office thatha kalas sthapana

   Navratra puja vidhi For house&o office thatha kalas sthapana
Navratri puja



नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्र में कलश स्थापना करके पूजन करने का बहुत अधिक महत्व है नवरात्रि में प्रतिपदा को कलश स्थापना की जाती है ।
Durga puja

तथा नवमी को विसर्जन किया जाता है, सभी भक्तों अपनी-अपनी मनोकामना सिद्धि के लिए घर तथा कारोबार में सुख समृद्धि धन धान्य ऐश्वर्य आदि की प्राप्ति के लिए नवरात्र में श्रद्धा पूर्वक मां दुर्गा का पूजन अर्चन करते हैं ।
तथा मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करते हैं
कलश स्थापना के लिए आवश्यक सामग्री



1.एक मिट्टी का कलश
2.एक मिट्टी का पात्र
3.मिट्टी की सराय वह दीपक
4.शुद्ध साफ की हुई मिट्टी जिसमें पत्थर कंकर आदि नहीं हो
5.मौली या कलावा
6.रोली
7.इलायची
8.चांदी का सिक्का
9रुई माचिस
10.मां दुर्गा का चित्र या मूर्ति
11.अशोक या आम के पत्ते
12.कलश को ढकने के लिए मिट्टी का ढक्कन
13 .साबुत चावल
14. एक पानी का नारियल
15.साबुत सुपारी
16.कलश में रखने के लिए सिक्के
17.लाल या पीला कपड़ा
18.एक माताजी की चुनरी
19.मिठाई
20.लाल गुलाब के फूलों की माला
21. एक चौकी


तो आइए जानते हैं कलश स्थापना किस प्रकार की जाए

Kalash sthapana
1.:-कलश स्थापना के लिए साधक को स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करनी चाहिए वह वस्त्र लाल या पीले हो तो बहुत ही शुभ होंगे।


2.:-तथा इसके पश्चात मंदिर या घर या फैक्ट्री मैं जहां भी साधक नवरात्रि कलश स्थापना करता है ।वहां पूर्व दिशा में या ईशान कोण में लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र या पीला वस्त्र बिछाकर उसके ऊपर मां दुर्गा का चित्र या मूर्ति स्थापित करना चाहिए।
Durga puja


3:-.तथा फिर जौ बोनेे के लिए एक मिट्टी के पात्र में स्वच्छ मिट्टी भरकर उसमें जौ डालकर उसे हल्का सा  मिलाकर पानी का छिड़काव कर दें।


4:-फिर उस पर मिट्टी का कलश स्थापित कर दें कलश में गंगाजल या गंगा जल मिश्रित जल भरदे तथा फिर कलश में रोली थोड़ा सा मीठा एक चांदी का सिक्का थोड़े से चावल डाल दे।


5:-फिर उस पर आम के पत्ते या अशोक के पत्ते लगाकर ढक्कन से ढक दें ढक्कन में चावल भर दे तथा फिर एक नारियल ले नारियल पर लाल कपड़ा या कलावा लपेटकर कलश पर रख दें तथा कलश के भी कलावा बांधने कलश पर स्वास्तिक बना दे।


6:-कलश पर रखे जाने वाले नारियल का मुंह आपकी तरफ होना चाहिए तथा नौक वाला हिस्सा दूसरी तरफ होना चाहिए।


7:-नारियल का मुंह नीचे की तरफ रखने से शत्रु वृद्धि होती है ।तथा ऊपर की तरफ रखने से रोग बढ़ते हैं ।तथा पूर्व की ओर रखने से धन हानि होती है । अतः नारियल का मुख साधक की तरफ ही होना चाहिए


8:-इसके पश्चात दीपक प्रज्वलित करें दीपक 9 दिन तक अखंड भी रख सकते हैं ।साधक या फिर अपनी सुविधा के अनुसार भी रख सकते हैं ।वैसे तो नवरात्रि में अखंड दीपक ही रखना चाहिए ।


9:-इसके पश्चात कलश में असंख्यात रूद्र देवताओं का आवाहन करना चाहिए तथा भगवान गणेश जी रिद्धि सिद्धि शुभ लाभ षोडश मातृका सप्तघृत मातृका नवग्रह देवता कुल पितृ देवता ब्रह्मा जी पंच लोकपाल देवता कुलदेवी कुलदेवता तथा आपके इष्ट का स्मरण करें उनका पूजन करें उनका आवाहन करें तत्पश्चात मां दुर्गा का आवाहन करें उनसे प्रार्थना करें कि हे मां दुर्गा आइए आप हमारे यहां करें विराजमान हुई है और हमारे पर कृपा करें


10:-आवाहन करने के पश्चात मां दुर्गा के चित्र या मूर्ति को स्नान कराएं वस्त्र वस्त्र अर्पण करें रोली का तिलक करें अक्षत तथा चित्र या मूर्ति को गुलाब की माला अर्पण करें तथा मिठाई का पंचमेवा का भोग लगाएं लौंग इलायची आदि चढ़ाएं तथा मां को अनार का फल का भोग लगाएं

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11:-भोग लगाने के पश्चात फिर आरती करें यह कार्य नव दिवस तक रोज करें तथा नौवें दिन नौ कन्या तथा एक बालक को भोजन कराकर कलश का जल घर में छिड़क दें तथा कुछ उगे हुए जौ को तिजोरी मे रखले
तथा अन्य को जल मैं विसर्जन करदें।