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Showing posts from October, 2021

अष्टलक्ष्मी साधना एवं प्रयोग

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अष्टलक्ष्मी साधना एवं प्रयोग श्री महालक्ष्मी स्तुति एवं आराधना  श्री अष्टलक्ष्मी मन्त्र सिद्धिविधानम्  - श्री अष्टलक्ष्मी महा मन्त्रम् - श्री अष्टलक्ष्मी माला मन्त्रम्  -  श्री अष्टलक्ष्मी स्तुतिः  श्री कमला प्रयोग - श्रीं महालक्ष्म्यै नमः-   अष्टलक्ष्मीस्तोत्रम् -  आदौ श्रीरमानाथध्यानं श्रीवत्सवक्षसं विष्णुं चक्रशङ्खसमन्वितम् । वामोरुविलसल्लक्ष्म्याऽऽलिङ्गितं पीतवाससम् ॥ सुस्थिरं दक्षिणं पादं वामपादं तु कुञ्जितम् । दक्षिणं हस्तमभयं वामं चालिङ्गितश्रियम् ॥ शिखिपीताम्बरधरं हेमयज्ञोपवीतिनम् । एवं ध्यायेद्रमानाथं पश्चात्पूजां समाचरेत् ॥ ऋषिः - छन्दः - देवता - विनियोगः अस्य श्रीअष्टलक्ष्मीमहामन्त्रस्य - दक्षप्रजापतिः ऋषिः - गायत्री छन्दः - महालक्ष्मीर्देवता - श्रीं बीजं - ह्रीं शक्तिः - नमः कीलकं - श्रीमहालक्ष्मीप्रसादेन अष्टैश्वर्यप्राप्तिद्वारा मनोवाक्कायसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ॥ करन्यासः श्रीं ह्रीं श्रीं कमले श्रीं ह्रीं श्रीं अङ्गुष्टाभ्यां नमः । श्रीं ह्रीं श्रीं कमलालये श्रीं ह्रीं श्रीं तर्जनीभ्यां नम ॥ श्रीं ह्रीं श्रीं प्रसीद श्रीं ह...

सूर्य उच्च-नीच ,शुभ-अशुभमीत्र-अमीत्र फल

सूर्य उच्च-नीच ,शुभ-अशुभमीत्र-अमीत्र फल अथ सूर्यस्य उच्चनीचस्वक्षेत्रमित्रामित्रमाह | तुंगोऽजस्तौलिनीचो गहनचरपतिः पद्मनीप्राणपालः शत्रू दैत्येज्यमंदौ शशिधरतनयौ यस्य सामान्यभावः ।  शेषा मित्राणि खेटा उपचयशुभगो मध्यमः कोशकोण केंद्रे दुष्टोऽतिदुष्टो व्ययगजभवने कीर्तितः कोविदोच्चैः ॥   सूर्य मेषका उच्च और तुलाका नीच कहाता है और सिंहराशिका स्वामी है । यह शुक्र शनैश्चरसे शत्रुता रखता है, बुधसे सामान्य प्रीति करता है और चंद्रमा, मंगल, बृहस्पति से मित्रभाव रखता है। सूर्य, तीसरे छठे, दशवे, ग्यारहवें इन स्थानोंमें स्थित शुभ फल देता है, द्वितीय, पंचम, नव ममें स्थित मध्यम फल देता है, लग्न, चतुर्थ, सप्तम, दशममें स्थित दुष्ट फल देता है और अष्टम, चतुर्थमें स्थित अतिदुष्ट फल देता है ॥ 

ज्योतिष के कुछ मुख्य नियम

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ज्योतिष में कुछ मुख्य नियम है जिनके विषय मे जानकारी देने का प्रयास करते हूँ। (1)जिस राशि मे सूर्य होता है सूर्य उदय के समय वही राशि उदय हो रही होती है  (2)राहु केतु सदैव एक दूसरे से विपरीत दिशा यानी 180° अंश पर होते है । (3)बुध हमेसा या तो सूर्य के साथ या सिर्फ एक भाव ही आगे या पीछे होता है। (4)शुक्र या तो सूर्य के साथ या सूर्य से बस दो ही घर आगे या पीछे होता है । (5)एक राशि 30 अंश की होती है  (6)एक राशि के सवा दो नक्षत्र होते है प्रत्येक नक्षत्र 13 अंश 20 कला का होता है  (7) सभी नक्षत्रों के 4 चरण होते है एक नक्षत्र 3 अंश 20 कला का होता है  (8)चन्द्र जिस राशि मे बेठे हो बही जन्म राशि होती है । (9)कुंडली के प्रथम भाव मे जो राशि होती है वो व्यक्ति की लगन राशि कहलाती है ओर जहाँ चन्द्र विराजमान हो वो जन्म राशि । (10)चन्द्र देव 24 घण्टे यानी एक दिन तक एक ही नक्षत्र में रहते है । (11)अमबस्या के दिन सूर्य चन्द्र एक ही राशि मे होते है । (12)सूर्य चन्द्र सदैव सीधी गति से चलते है  अर्थात कभी वक्री नही होते है । (13) राहु केतु सदैव उल्टी गति से ही चलते है सदैव...

गणेशजी की सूंड दांई या बाईं ओर?

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श्री गणेश की दाईं सूंड या बाईं सूंड ?   गणेश की प्रतिमा लाने से पूर्व या घर में स्थापना से पूर्व हमारे मन में यह सवाल आता है कि श्री गणेश सूंड कौन सी औरत होनी चाहिये ? क्या कभी आपने ध्यान दिया है कि भगवान गणेश की तस्वीरों और मूर्तियों में उनकी सूंड दाई या कुछ में बाई ओर होती है। सीधी सूंड वाले गणेश भगवान दुर्लभ हैं। इनकी एकतरफ मुड़ी हुई सूंड के कारण ही गणेश जी को वक्रतुण्ड कहा जाता है। भगवान गणेश के वक्रतुंड स्वरूप के भी कई भेद हैं। कुछ मुर्तियों में गणेशजी की सूंड को बाई को घुमा हुआ दर्शाया जाता है तो कुछ में दाई ओर। गणेश जी की सभी मूर्तियां सीधी या उत्तर की ओर सूंड वाली होती हैं। मान्यता है कि गणेश जी की मूर्त जब भी दक्षिण की ओर मुड़ी हुई बनाई जाती है तो वह टूट जाती है। कहा जाता है कि यदि संयोगवश आपको दक्षिणावर्ती मूर्त मिल जाए और उसकी विधिवत उपासना की जाए तो अभिष्ट फल मिलते हैं। गणपति जी की बाईं सूंड में चंद्रमा का और दाईं में सूर्य का प्रभाव माना गया है।  प्राय: गणेश जी की सीधी सूंड तीन दिशाओ से दिखती है। जब सूंड दाईं ओर घूमी होती है तो इसे पिंगला स्वर और सूर्य...

ग्रह और उनके अशुभ फल

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ग्रह और उनके अशुभ फल  हम हमेशा हि चाहते है कि हमारे जीवन में जो भी हो वो शुभ ही हो । कीन्तु हम यह भी जानते है कि जीवन में शुभ और अशुभ दोनो होते है, इसिलए लिए तो कहा गया है कि सुख और दुख जीवन के दो पहिये है। तो आज ग्रहों से मिलने वाले अशुभ फल के बारे में जानते है।जिससे हम उनके उपाय करके उनकी अशुभता कुछ कम कर सके। 🌞 सूर्य सरकारी नौकरी या सरकारी कार्यों में परेशानी, सिर दर्द, नेत्र रोग, हृदय रोग, अस्थि रोग, चर्म रोग, पिता से अनबन आदि। 🌙 चंद्र मानसिक परेशानियां, अनिद्रा, दमा, कफ, सर्दी, जुकाम, मूत्र रोग, स्त्रियों को मासिक धर्म, निमोनिया। 🚩 मंगल अधिक क्रोध आना, दुर्घटना, रक्त विकार, कुष्ठ रोग, बवासीर, भाइयों से अनबन आदि। 🏹 बुध गले, नाक और कान के रोग, स्मृति रोग, व्यवसाय में हानि, मामा से अनबन आदि। 🙏 गुरु धन व्यय, आय में कमी, विवाह में देरी, संतान में देरी, उदर विकार, गठिया, कब्ज, गुरु व देवता में अविश्वास आदि। 🏐 शुक्र जीवन साथी के सुख में बाधा, प्रेम में असफलता, भौतिक सुखों में कमी व अरुचि, नपुंसकता, मधुमेह, धातु व मूत्र रोग आदि। 👤 शनि वायु विकार, लकवा, कैंसर, कुष्ठ ...