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Tuesday, 6 March 2018
Navratra puja vidhi For House & office thatha kalas sthapana
Navratra puja vidhi For house&o office thatha kalas sthapana
नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्र में कलश स्थापना करके पूजन करने का बहुत अधिक महत्व है नवरात्रि में प्रतिपदा को कलश स्थापना की जाती है ।
तथा नवमी को विसर्जन किया जाता है, सभी भक्तों अपनी-अपनी मनोकामना सिद्धि के लिए घर तथा कारोबार में सुख समृद्धि धन धान्य ऐश्वर्य आदि की प्राप्ति के लिए नवरात्र में श्रद्धा पूर्वक मां दुर्गा का पूजन अर्चन करते हैं ।
तथा मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करते हैं
तथा नवमी को विसर्जन किया जाता है, सभी भक्तों अपनी-अपनी मनोकामना सिद्धि के लिए घर तथा कारोबार में सुख समृद्धि धन धान्य ऐश्वर्य आदि की प्राप्ति के लिए नवरात्र में श्रद्धा पूर्वक मां दुर्गा का पूजन अर्चन करते हैं ।
तथा मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करते हैं
कलश स्थापना के लिए आवश्यक सामग्री
1.एक मिट्टी का कलश
2.एक मिट्टी का पात्र
3.मिट्टी की सराय वह दीपक
4.शुद्ध साफ की हुई मिट्टी जिसमें पत्थर कंकर आदि नहीं हो
5.मौली या कलावा
6.रोली
7.इलायची
8.चांदी का सिक्का
9रुई माचिस
10.मां दुर्गा का चित्र या मूर्ति
2.एक मिट्टी का पात्र
3.मिट्टी की सराय वह दीपक
4.शुद्ध साफ की हुई मिट्टी जिसमें पत्थर कंकर आदि नहीं हो
5.मौली या कलावा
6.रोली
7.इलायची
8.चांदी का सिक्का
9रुई माचिस
10.मां दुर्गा का चित्र या मूर्ति
11.अशोक या आम के पत्ते
12.कलश को ढकने के लिए मिट्टी का ढक्कन
13 .साबुत चावल
14. एक पानी का नारियल
15.साबुत सुपारी
16.कलश में रखने के लिए सिक्के
17.लाल या पीला कपड़ा
18.एक माताजी की चुनरी
19.मिठाई
20.लाल गुलाब के फूलों की माला
21. एक चौकी
12.कलश को ढकने के लिए मिट्टी का ढक्कन
13 .साबुत चावल
14. एक पानी का नारियल
15.साबुत सुपारी
16.कलश में रखने के लिए सिक्के
17.लाल या पीला कपड़ा
18.एक माताजी की चुनरी
19.मिठाई
20.लाल गुलाब के फूलों की माला
21. एक चौकी
तो आइए जानते हैं कलश स्थापना किस प्रकार की जाए
1.:-कलश स्थापना के लिए साधक को स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करनी चाहिए वह वस्त्र लाल या पीले हो तो बहुत ही शुभ होंगे।
2.:-तथा इसके पश्चात मंदिर या घर या फैक्ट्री मैं जहां भी साधक नवरात्रि कलश स्थापना करता है ।वहां पूर्व दिशा में या ईशान कोण में लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र या पीला वस्त्र बिछाकर उसके ऊपर मां दुर्गा का चित्र या मूर्ति स्थापित करना चाहिए।
3:-.तथा फिर जौ बोनेे के लिए एक मिट्टी के पात्र में स्वच्छ मिट्टी भरकर उसमें जौ डालकर उसे हल्का सा मिलाकर पानी का छिड़काव कर दें।
4:-फिर उस पर मिट्टी का कलश स्थापित कर दें कलश में गंगाजल या गंगा जल मिश्रित जल भरदे तथा फिर कलश में रोली थोड़ा सा मीठा एक चांदी का सिक्का थोड़े से चावल डाल दे।
5:-फिर उस पर आम के पत्ते या अशोक के पत्ते लगाकर ढक्कन से ढक दें ढक्कन में चावल भर दे तथा फिर एक नारियल ले नारियल पर लाल कपड़ा या कलावा लपेटकर कलश पर रख दें तथा कलश के भी कलावा बांधने कलश पर स्वास्तिक बना दे।
6:-कलश पर रखे जाने वाले नारियल का मुंह आपकी तरफ होना चाहिए तथा नौक वाला हिस्सा दूसरी तरफ होना चाहिए।
7:-नारियल का मुंह नीचे की तरफ रखने से शत्रु वृद्धि होती है ।तथा ऊपर की तरफ रखने से रोग बढ़ते हैं ।तथा पूर्व की ओर रखने से धन हानि होती है । अतः नारियल का मुख साधक की तरफ ही होना चाहिए
8:-इसके पश्चात दीपक प्रज्वलित करें दीपक 9 दिन तक अखंड भी रख सकते हैं ।साधक या फिर अपनी सुविधा के अनुसार भी रख सकते हैं ।वैसे तो नवरात्रि में अखंड दीपक ही रखना चाहिए ।
9:-इसके पश्चात कलश में असंख्यात रूद्र देवताओं का आवाहन करना चाहिए तथा भगवान गणेश जी रिद्धि सिद्धि शुभ लाभ षोडश मातृका सप्तघृत मातृका नवग्रह देवता कुल पितृ देवता ब्रह्मा जी पंच लोकपाल देवता कुलदेवी कुलदेवता तथा आपके इष्ट का स्मरण करें उनका पूजन करें उनका आवाहन करें तत्पश्चात मां दुर्गा का आवाहन करें उनसे प्रार्थना करें कि हे मां दुर्गा आइए आप हमारे यहां करें विराजमान हुई है और हमारे पर कृपा करें
10:-आवाहन करने के पश्चात मां दुर्गा के चित्र या मूर्ति को स्नान कराएं वस्त्र वस्त्र अर्पण करें रोली का तिलक करें अक्षत तथा चित्र या मूर्ति को गुलाब की माला अर्पण करें तथा मिठाई का पंचमेवा का भोग लगाएं लौंग इलायची आदि चढ़ाएं तथा मां को अनार का फल का भोग लगाएं
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11:-भोग लगाने के पश्चात फिर आरती करें यह कार्य नव दिवस तक रोज करें तथा नौवें दिन नौ कन्या तथा एक बालक को भोजन कराकर कलश का जल घर में छिड़क दें तथा कुछ उगे हुए जौ को तिजोरी मे रखले
तथा अन्य को जल मैं विसर्जन करदें।
तथा अन्य को जल मैं विसर्जन करदें।
Sunday, 4 March 2018
Lotry, share market ,satte baji se achank dhan prapti
"Lotry, share market ,satte baji se achank dhan prapti"
Hamare hath me sampuran jivan ka lekha jhokha hota hai. Arthat hath ki Rekhaon yadi sahi se dekha jaye to hamre jivan me hone vali sabhi shubh -ashubh ghatnao ke bare me jan sakte hai .
(1) Kab hamare jivan me kya labh- hani hogi .
Kuch rekhaye vyakti ke hath me aajivan rahti hai.
Kuch rekhaye vyakti ke hath me aajivan rahti hai.
Thatha kuch rekhaye bhanti bigadti rahti hai .
(2)Usi mese aaj hum janne ki kosis karenge ki hamri lottry lagegi ya nhi ya achanak dhan prapti hoga kya ?
To aaiye jante hai asi hi ek rekha ke bare me.
(3)Yadi sani kshetra se nikal kar koi rekha strong progresh line (sakti sali prabhav rekha ) sun mount ke niche se hoti hui use saprsh karti hui . Bina sun maunt ko kate health line ko saprsh karti ho to ase jatak chamatkarik dhang se , sanyogvas ya apratyashit rup se dhanavan bante hai
(4) Ase jatak lottery jekpot ,share market, lakki draw thatha satte baji aadi kshetro se dhan prapt karte hai inhe . Lottery, share market, satte baji aadi kshetro me safalta hasil hoti hai
(5) Yadi khaha jaye to ese jatko ko share market jese kshetro ko hi apna career chunna chahiye .
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Saturday, 3 March 2018
Brother , sister line भाई-बहन रेखा
Brother , sister line भाई-बहन रेखा
Bhai behan ke baare mein Hath Mein Do Prakar se jaan sakte hai.
Moti rekha bhai ki suchak hoti hai thatha patli rekha bhan ki suchak hoti hai
Moti rekha bhai ki suchak hoti hai thatha patli rekha bhan ki suchak hoti hai
1.
Shukra Parvat Par aadi Rekhaon ke dwara.
Shukra Parvat Par aadi Rekhaon ke dwara.
2. Pratham Mangal Parvat ke paas hridaya Rekha ke neeche.
(1) Agar bhai behan Rekha Tuti hui ho toh bhai behan Mein viyog Hota Hai.
(2) spast do gahari rekhaye pass pass sati hui ho to bhai behan main bahut adhik Prem Hota Hai Yeh Ek Doosre ke Sahayak Hote Hain.
(3) yadi 1 Moti Rekha ke paas 1 spasht Patli Rekha Hoto whah Rekha aapas mein Sati hui ho toh aisa vyakti apni behan se bahut Adhik Prem karta hai usse apni behan se bahut Adhik lagau hota hai apni Behan ka Hamesha Sukh Dukh Mein Saath deta hai aajivan apni behan ke sabhi Sukh Dukh Me bhagidar Hota Hai.
(4) Yadi Patli Rekha ko Koi Annaya Rekha Katti ho toh behan ko kast hota hai aur yadi Moti Rekha ko Koi anya rekka Katti ho toh bhai ko kast Hota Hai .
Friday, 2 March 2018
विवाह रेखा marriage line in palm
विवाह रेखा अर्थात जीवनसाथी से अनुराग
marriage line in palm
:- स्त्री पुरुष दोनों ही जीवन में विवाह के पश्चात एक नया अध्याय शुरू करते हैं यह एक नया जीवन प्रारंभ करते हैं ।
:- विवाह रेखा का यह आशय से नहीं होता है ,कि विवाह होगा कि यह केवल स्त्री पुरुष में कैसा संबंध रहेगा यह सूचित करती है ।
:- विवाह के विषय में अन्य रेखाओं और ग्रहो पर दृष्टि डाली जानी चाहिए ।
:- (1)यह बुध पर्वत के समीप बुध तथा हृदय रेखा के बीच में स्थित होती है ।
:- (2) कनिष्टिका के नजदीक हो तो विवाह में देरी,
:-(3) ह्रदय रेखा के पास हो तो कम उम्र में विवाह होता है ।
:- पतली एवं स्पष्ट विवाह रेखा सुखी जीवन का प्रतीक मानी गई है ।
:- ह्रदय रेखा के समीप हो तो :=
यदि ह्रदय रेखा के समीप विवाह रेखा हो तो ऐसे जातकों का 14 से 18 वर्ष की उम्र में विवाह होता है अथवा वह प्रेम संबंध भी हो सकता है ।
यदि ह्रदय रेखा के समीप विवाह रेखा हो तो ऐसे जातकों का 14 से 18 वर्ष की उम्र में विवाह होता है अथवा वह प्रेम संबंध भी हो सकता है ।
:-कनिष्टिका और हृदय रेखा के बीच में :=
यदि कनिष्ठिका और ह्रदय रेखा के बीच में विवाह रेखा हो तो ऐसे जातकों का विवाह 21 से 27 वर्ष की उम्र में होता है ।
:-कनिष्टिका के पास हो तो :=
यदि विवाह रेखा कनिष्टिका के नजदीक हो तो ऐसे जातकों का विवाह 28 से 35 वर्ष की उम्र में होता है अर्थात विलंब से होता है ।
यदि विवाह रेखा कनिष्टिका के नजदीक हो तो ऐसे जातकों का विवाह 28 से 35 वर्ष की उम्र में होता है अर्थात विलंब से होता है ।
:-ह्रदय रेखा की और झुकी विवाह रेखा:=
यदि विवाह रेखा हृदय रेखा की तरफ झुकी हुई हो तो पत्नी तथा पति के मध्य वियोग कलह पैदा हो सकता है या दोनों अलग अलग रहने लग जाते हैं ।
यदि विवाह रेखा हृदय रेखा की तरफ झुकी हुई हो तो पत्नी तथा पति के मध्य वियोग कलह पैदा हो सकता है या दोनों अलग अलग रहने लग जाते हैं ।
:-विवाह रेखा हृदय रेखा को काटे तो :=
यदि विवाह रेखा हृदय रेखा को काटे तो ऐसे जातकों का जीवनसाथी की मृत्यु या मृत्यु तुल्य कष्ट प्राप्त होने के संकेत होते हैं, इसी के साथ यदि दो विवाह रेखा हो तो पुनर्विवाह होने के योग होते हैं तथा सुख पूर्वक जीवन व्यतीत होता है ।
यदि विवाह रेखा हृदय रेखा को काटे तो ऐसे जातकों का जीवनसाथी की मृत्यु या मृत्यु तुल्य कष्ट प्राप्त होने के संकेत होते हैं, इसी के साथ यदि दो विवाह रेखा हो तो पुनर्विवाह होने के योग होते हैं तथा सुख पूर्वक जीवन व्यतीत होता है ।
:-द्वीप युक्त विवाह रेखा :=
यदि किसी जातक के विवाह रेखा के मध्य द्वीप या यव(जौ) बन रहा हो तो यह स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण होती है यह दुर्भाग्य का सूचक होती है ,ऐसे जातकों को अपने जीवन में धोखेबाजी से विवाह होने के संकेत होते हैं, तथा अपने वैवाहिक जीवन में आगे भी यह जातक कष्ट सहन करते हैं ,और यदि यह रेखा आगे जाकर स्पष्ट हो तो विवाह सुख पूर्वक व्यतीत होता है, सुख पूर्वक जीवन निर्वाह होता है ।
यदि किसी जातक के विवाह रेखा के मध्य द्वीप या यव(जौ) बन रहा हो तो यह स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण होती है यह दुर्भाग्य का सूचक होती है ,ऐसे जातकों को अपने जीवन में धोखेबाजी से विवाह होने के संकेत होते हैं, तथा अपने वैवाहिक जीवन में आगे भी यह जातक कष्ट सहन करते हैं ,और यदि यह रेखा आगे जाकर स्पष्ट हो तो विवाह सुख पूर्वक व्यतीत होता है, सुख पूर्वक जीवन निर्वाह होता है ।
:-सूर्य क्षेत्र पर विवाह रेखा:=
यदि किसी जातक के विवाह रेखा बढ़कर सूर्य तक पहुंचती हो तो ऐसे जातक बहुत ही सौभाग्यशाली होते हैं वह अपने जीवन में प्रतिष्ठा मान-सम्मान आदि प्राप्त करते हैं इनका विवाह प्रतिष्ठित परिवार में होता है धनी परिवार में होता तथा वहां से इन्हें धन धान्य की प्राप्ति होती है सम्माननीय परिवार में विवाह होने के कारण इन लोगों को बहुत सम्मान प्राप्त होता है ।
यदि किसी जातक के विवाह रेखा बढ़कर सूर्य तक पहुंचती हो तो ऐसे जातक बहुत ही सौभाग्यशाली होते हैं वह अपने जीवन में प्रतिष्ठा मान-सम्मान आदि प्राप्त करते हैं इनका विवाह प्रतिष्ठित परिवार में होता है धनी परिवार में होता तथा वहां से इन्हें धन धान्य की प्राप्ति होती है सम्माननीय परिवार में विवाह होने के कारण इन लोगों को बहुत सम्मान प्राप्त होता है ।
:-विवाह रेखा पर क्रॉस का चिन्ह :=
यदि किसी जातक के हाथ में स्थित विवाह रेखा पर क्रॉस (x) का चिन्ह हो तो ऐसे जातक अपने जीवनसाथी की मृत्यु की सूचना प्राप्त करते हैं ।उनके जीवनसाथी की मृत्यु किसी दुर्घटना मैं होती है । यदि हस्त के अंदर अन्य चिन्ह शुभ हो जीवन रेखा सुंदर और स्पष्ट हो तो ऐसे जातकों की जान बच जाती है ।
यदि किसी जातक के हाथ में स्थित विवाह रेखा पर क्रॉस (x) का चिन्ह हो तो ऐसे जातक अपने जीवनसाथी की मृत्यु की सूचना प्राप्त करते हैं ।उनके जीवनसाथी की मृत्यु किसी दुर्घटना मैं होती है । यदि हस्त के अंदर अन्य चिन्ह शुभ हो जीवन रेखा सुंदर और स्पष्ट हो तो ऐसे जातकों की जान बच जाती है ।
:-बहु विवाह रेखा:-
यदि किसी जातक के हाथ में एक से अधिक विवाह रेखाएं हो तो ऐसे जातकों के एक से अधिक विवाह अथवा प्रेम संबंध होने के संकेत होते हैं सामान्यतः एक विवाह रेखा को ही शुभ माना गया है ।
यदि किसी जातक के हाथ में एक से अधिक विवाह रेखाएं हो तो ऐसे जातकों के एक से अधिक विवाह अथवा प्रेम संबंध होने के संकेत होते हैं सामान्यतः एक विवाह रेखा को ही शुभ माना गया है ।
:-जीवन रेखा शनि पर पहुंचे तो :=
यदि जीवन रेखा आगे बढ़कर शनि क्षेत्र पर पहुंचती हो तो यह जीवन रेखा अत्यंत अशुभ लक्षण प्रदान करती है, अशुभ फल प्रदान करती है ऐसे जातकों के जीवनसाथी को यातनाएं प्राप्त होती रहती हैं। ऐसे जातक हत्या भी कर सकते हैं ,ऐसे जातक मानसिक परेशानी से भी जूझते रहते हैं ,तथा सूर्य पर्वत दबा हुआ हो तथा जीवन रेखा पर अशुभ चिन्ह हो तो ऐसे जातकों को मृत्युदंड भी प्राप्त हो सकता है ।
यदि जीवन रेखा आगे बढ़कर शनि क्षेत्र पर पहुंचती हो तो यह जीवन रेखा अत्यंत अशुभ लक्षण प्रदान करती है, अशुभ फल प्रदान करती है ऐसे जातकों के जीवनसाथी को यातनाएं प्राप्त होती रहती हैं। ऐसे जातक हत्या भी कर सकते हैं ,ऐसे जातक मानसिक परेशानी से भी जूझते रहते हैं ,तथा सूर्य पर्वत दबा हुआ हो तथा जीवन रेखा पर अशुभ चिन्ह हो तो ऐसे जातकों को मृत्युदंड भी प्राप्त हो सकता है ।
Not= यदि दोनों ही हाथों में दो दो विवाह रेखाएं सुंदर और स्पष्ट हो तो ऐसे जा जातक का विवाह निश्चय ही होता है ।
Thursday, 1 March 2018
हस्त मे तिल part 1
हस्त मे तिल
![]() |
| hast me til |
सभी यह सोचते हैं कि यदि किसी व्यक्ति के हाथ में तिल हो तो वह बहुत अच्छा धनवान होगा उसे आजीवन रुपये-पैसे की किसी भी समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा लेकिन यह पूर्ण सच नहीं है हथेली पर स्थित तिल अपना शुभ और अशुभ फल प्रदान करते हैं
सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार
सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार
1 :-
सूर्य पर्वत पर तिल अर्थात सूर्य संबंधित क्षेत्रों से कष्ट हो सकता है ,सरकारी क्षेत्र अथवा रोजगार कमाने में समस्या आ सकती है|
सूर्य पर्वत पर तिल अर्थात सूर्य संबंधित क्षेत्रों से कष्ट हो सकता है ,सरकारी क्षेत्र अथवा रोजगार कमाने में समस्या आ सकती है|
2.चंद्र पर्वत पर तिल ऐसे जातकों का मन चंचल और बेचैन होता है जीवन में प्यार की कमी रहती है इन्हें पग पग पर असफलता ही हाथ लगती है इनकी शादी में भी अनेकों समस्याएं उत्पन्न होती है तथा माता का स्वास्थ्य भी अच्छा नहीं रहता है
3.शनि पर्वत पर तिल यह बहुत शुभ माना जाता है शनि संबंधित सभी क्षेत्रों से ऐसे जातकों को परेशानियां आती रहती है तथा अनेकों समस्याओं का सामना करना पड़ता है
इनका भाग्य बीन का साथ नहीं देता है जीवन में इनको अनेकों बार सफलताएं प्राप्त होती है इन्हें आजीवन कष्ट सहना पड़ता है तथा जीवन संघर्ष करना पड़ता है
इनका भाग्य बीन का साथ नहीं देता है जीवन में इनको अनेकों बार सफलताएं प्राप्त होती है इन्हें आजीवन कष्ट सहना पड़ता है तथा जीवन संघर्ष करना पड़ता है
4.शुक्र पर्वत पर तिल ऐसे जातक बहुत सारे प्रेम-संबंधों से घिरे रहते हैं तथा यह संबंध बनते बिगड़ते रहते हैं इसी कारण इन्हें हानि भी उठानी पड़ती है यह जातक कामुक होते हैं तथा बहुत खर्चीले स्वभाव के होते हैं लेकिन इन्हें जीवन में कभी भी धन की कमी नहीं होती है
5.गुरु पर्वत पर तिल इन जातकों के विवाह में परेशानियां आती है किसी भी कार्य में उचित सफलता हासिल नहीं होती है
6.बुध पर्वत पर तिल वाले जातकों को अचानक नुकसान हो सकता है ऐसी स्थिति बनने पर सावधानी से कार्य किया जाए तो सफलता मिलती है
Not:- बाई हथेली (मध्य में) में तिल हो तो व्यक्ति खूब दौलत कमाता है किंतु खर्चीले स्वभाव के कारण पैसा जोड़ नहीं पाता है दाई हथेली पर तिल हो वाले जातक धन-धान्य से संपन्न होते हैं
Monday, 26 February 2018
जीवन रेखा life line
जीवन रेखा { life line }
![]() |
| life line |
1:- जीवन रेखा को पितृ रेखा ,गोत्र रेखा , कुल रेखा भी कहा जाता है।
2:-यह रेखा तर्जनी पता अंगूठे के बीच के क्षेत्र से आरंभ होकर शुक्र क्षेत्र को गिरती हुई मणिबंध तक जाती है।
3:- जीवन रेखा से आयु जीवन में होने वाली दुर्घटनाओं जीवन शक्ति भाग्योदय आदि का विचार किया जाता है ।
4:-यदि जीवन रेखा शुक्र क्षेत्र को पर्याप्त विस्तार का अवसर देती हुई आगे बढ़े तो जातक का स्वास्थ्य अच्छा रहता है ।
5:-क्योंकि शुक्र क्षेत्र उत्साह उत्तम स्वास्थ्य तथा प्रभावशाली व्यक्तित्व का प्रतिनिधित्व करता है ।
6:- यदि जीवन रेखा शुक्र क्षेत्र का विस्तार छोटा करती हुई आगे बढ़ जाए तो ऐसे जातकों का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है ।
7:-तथा जातक निराशावादी डरपोक भीरु स्वभाव तथा ठंडे स्वभाव के होते हैं यदि शुक्र क्षेत्र विस्तृत हो तो ऐसे जातक की कार्य क्षमता अच्छी होती है काम शक्ति तथा विपरीत लिंग के प्रति विशेष आकर्षण का स्वभाव आ जाता है ।
8:- शुक्र पर्वत का विस्तार अधिक होने से जातक अधिक काम ही स्वभाव का हो जाता है वह उचित तथा अनुचित का विचार छोड़कर स्वच्छंद योनाचार करता है तथा अन्य लक्षण अशुभ हो तो वह बीमारियों से भी ग्रसित हो जाता है इन लोगों को कई बार सामाजिक अपमान का भी सामना करना पड़ता है ।
9:-यदि शुक्र क्षेत्र विस्तृत तो ऐसे जातक जन्मजात भाग्यशाली होते हैं तथा पैतृक संपत्ति के स्वामी तथा माता पिता की समृद्धि का सुख भोगते हैं तथा कुलवान तथा लंबी आयु प्राप्त करते हैं।
10:-जीवन रेखा का आरंभ सामान्यता बृहस्पति और मंगल पर्वत के मध्य से होता है यह स्थिति शुभ और संतुलित मानसिकता एवं शारीरिक शक्ति की परिचायक है।
11:- बृहस्पति क्षेत्र से जीवन रेखा का आरंभ हो तो जातक स्वभाव से जन्मजात उच्च आकांक्षाएं की प्रवृत्ति लेकर आता है यह अपनी लगन के पक्के होते हैं यह जिस कार्य में हाथ डालते वह कार्य पूर्ण कर कर ही छोड़ते हैं।
12:- निम्न मंगल क्षेत्र से यदि जीवन रेखा का प्रारंभ होता है तो यह स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है ऐसे जातक का जीवन संघर्षशील तथा विषम परिस्थितियों से घिरा हुआ रहता है निर्मल स्वास्थ्य तथा जीवन में परेशानियां आती रहती है ।
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Saturday, 24 February 2018
Which hand is to be seen कौन सा हाथ देखा जाए
Which hand is to be seen
कौन सा हाथ देखा जाए
हस्य परीक्षण से पूर्व मन में यह प्रश्न उठता है कि स्त्री का कौन सा हाथ देखा जाए तथा पुरुष का कौन सा हाथ देखा जाए
1:= इस संबंध में देशी तथा विदेशी विद्वानों के भिन्न-भिन्न मध्य हैं सामान्यता वयस्क पुरुषों का दाया हाथ तथा स्त्रियों का बाया हाथ देखा जाना चाहिए जो पुरुष लिखने-पढ़ने भोजन करने आदि में अपने बाएं हाथ का प्रयोग करते हैं तो उनके बाएं हाथ का ही परीक्षण करना चाहिए
2. तथा जो स्त्रियां स्वावलंबी है अर्थात जो स्त्रियां पुरुषों के भाँति नौकरी-व्यवसाय आदि से धनोपार्जन करती है या राजनीतिक सामाजिक अथवा धार्मिक सार्वजनिक क्षेत्रों में पुरुषों की भांति कार्य करती हूं उनके भी दाएं हाथ का ही परीक्षण करना चाहिए
3. जो पुरुष नौकरी नहीं करते हो धनोपार्जन नहीं करते हो दूसरे पर आश्रित हो या उनका व्यवहार स्त्री के भाँति हो अर्थात स्त्रियोचित व्यवहार करते हो या डरपोक स्वभाव के हो पराधीन हो उनके बाएं हाथ का परीक्षण करना चाहिए
4. 14 वर्ष तक की आयु के बालक का भी बाँया हाथ ही देखना चाहिए
तथा 14 वर्ष तक की आयु कि बालिका का भी बाँया हाथ ही देखना चाहिए
तथा 14 वर्ष तक की आयु कि बालिका का भी बाँया हाथ ही देखना चाहिए
5. हस्त परीक्षा करते समय सामान्यतः जातक के दोनों ही हाथों का परीक्षण करना चाहिए जो लक्षण दोनों हाथों में समान रूप से मिलते हो उन्हें निर्णायक समझना चाहिए तथा जो लक्षण जातक के दोनों हाथों में अलग-अलग हो तो उनका परिणाम संशय पूर्ण मानकर दोनों के निष्कर्ष रूप में जो उचित फल समझ में आए वह कहना चाहिए
6. कुछ विद्वानों के मत के अनुसार पुरुष के दाएं हाथ से उसके व्यक्तित्व उसके स्वभाव चरित्र तथा भूत भविष्य वर्तमान आदि का हाल प्राप्त किया जाता है तथा बाएं हाथ से उसकी पत्नी के व्यक्तित्व स्वभाव चरित्र आदि की जानकारी प्राप्त की जाती है
7. इसी प्रकार स्त्री के बाएं हाथ से उसके अपने तथा दाएं हाथ से उसके पति के विषय में अनुमान लगाया जाता है
दायां हाथ पुरुष के वर्तमान जन्म तथा बाया हाथ पूर्व जन्म के भाग्य तथा कर्मों का साक्षी होता है इसी प्रकार स्त्री का बायां हाथ उसके वर्तमान जन्म तथा दायां हाथ उसके पूर्व जन्म के भाग्य का प्रतीक माना जाता है
दायां हाथ पुरुष के वर्तमान जन्म तथा बाया हाथ पूर्व जन्म के भाग्य तथा कर्मों का साक्षी होता है इसी प्रकार स्त्री का बायां हाथ उसके वर्तमान जन्म तथा दायां हाथ उसके पूर्व जन्म के भाग्य का प्रतीक माना जाता है
8.अतः इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि गृहणी स्त्री का बायां हाथ तथा कामकाजी स्त्री का दायां हाथ देखा जाना चाहिए
तथा पुरुष का दायां हाथ देखा जाना चाहिए
तथा पुरुष का दायां हाथ देखा जाना चाहिए
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Friday, 23 February 2018
Friday, 16 February 2018
Thursday, 15 February 2018
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