Saturday, 17 June 2017

How to read the palm हाथ देखने के नियम

How to read the palm हाथ देखने के नियम


हाथ दिखाने वाले व्यक्ति प्रातः काल स्नानादि से निवृत्त होकर ईश्वर का ध्यान करके शुद्ध मन से हंसते रेखा शास्त्री के पास जाएं और अपने हाथ का परीक्षण का करवाएं

हस्तरेखा दिखाने वाला जातक विनय श्रद्धालु तथा गुरू वचनों पर विश्वास करने वाला होना चाहिए हस्त परीक्षक जो उक्त समय गुरु के ही समान होता है उसे उचित आसन प्रदान करें तथा दत्तचित्त होकर हस्त परीक्षक की बातों को सुनें अपने मन में वाले उठने वाले सवालों सिक्का उनसे जवाब मांगे या अपना भविष्यफल उनसे जाने कुतर्क नहीं करें हस्तरेखा विद को कतर की श्रद्धा रहित नास्तिकता सत्यवादी नवजात शिशुओं पर हिंसा करने वाले हिंसक पागलों हस्तरेखा शास्त्र य हस्तरेखाओं का कुटिलता से मजाक उड़ाने वाले शराबी आधी व्यक्तियों का हाथ नहीं देखना चाहिए


संसार में प्रकृति नियमानुसार ही चलती है उसी प्रकार से हस्त रेखा विद को भी नियमानुसार ही हस्त का परीक्षण करना चाहिए सूर्य नियमानुसार पूर्व में उदित होकर दक्षिण में अस्त होता है उसी प्रकार से स्कूल कार्यालय आदि अपने समय पर खुलकर अपने समय पर ही चलते हैं


क्योंकि यदि नियम नहीं हो तो प्रकृति दोस्त हो जाती है या कार्य गड़बड़ा जाते हैं अतः हस्तरेखा विद को नियमानुसार ही हस्तरेखाओं का परीक्षण करना चाहिए


पाश्चात्य मतानुसार हंसता परीक्षक को चाहिए कि वह जातक का हाथ देखने से पहले उसके हाथ का स्पर्श नहीं करें क्योंकि ऐसा करने से परीक्षक की चुंबकीय शक्ति का जातक की चुंबकीय शक्ति शक्ति के साथ मिलकर जाने से देखा हूं अधिकार रंग बदल सकता है रंग आदि में थोड़ा बहुत बदलाव आ जाता है अतः आपको बिना स्पष्ट करेगी देखना चाहिए


1. हस्त परीक्षण के लिए उचित प्रकाश की व्यवस्था होनी चाहिए

2. सर्वप्रथम जातक के मणिबंध का निरीक्षण करना चाहिए

3. उसके पश्चात जातक के हथेली की बनावट देखनी चाहिए क्योंकि हाथों को सात प्रकार के विभागों में बांटा गया है उन 7 विभागों में से जिस विभाग का हाथ हो उस विभाग आपके हाथ का फलित कहना चाहिए चमत्कार हाथ कोमल हाथ वर्गाकार हाथ आदि

4. करतल तथा कर पृष्ठ दोनों का निरीक्षण करना चाहिए

5. तत्पश्चात जातक की उंगलियों का निरीक्षण करें उंगलियों की बनावट देखनी चाहिए उंगलियां लंबी है मोटी है या टॉप आकार है कोमल है यह सत्य है इन सभी का निरीक्षण करना चाहिए

6. तत्पश्चात जातक के अंगूठे की बनावट देखनी चाहिए जातक के अंगूठे की लंबाई मोटाई चौड़ाई आदि का निरीक्षण करें छोटे या बड़े अंगूठे का निरीक्षण करें अंगूठा किस तरफ दुख है उसका निरीक्षण करें हम उठा सकते है का टॉप आकार है

7. तत्पश्चात रेखाओं का निरीक्षण करना चाहिए रेखाओं में सर्वप्रथम जीवन रेखा का निरीक्षण निरीक्षण करना उचित माना जाता है रेखा मोटी की उपयुक्त साफ या दूरी है इसका उद्गम स्थल कहां से है यह सब का निरीक्षण करना चाहिए

8. जीवन रेखा का निरीक्षण करने के पश्चात मस्तिष्क रेखा का परीक्षण करना चाहिए मस्तिष्क रेखा का उद्गम आकार-प्रकार लंबाई रेखा का अंत कहां हो रहा है किस प्रकार से हो रहा है रेखा पर शुभ अशुभ चिन्ह है उनका निरीक्षण भी करना चाहिए

9. तत्पश्चात ह्रदय रेखा का निरीक्षण करना चाहिए उसका उद्गम उद्गम स्थान रेखा कहां खत्म हो रही है उस पर शुभ अशुभ लक्षण सभी को देखना चाहिए

10. मुख्य रेखाओं का निरीक्षण करने के पश्चात अतिरिक्त छोटी छोटी रेखाओं का देखना चाहिए चंद्र रेखा सूर्य रेखा विवाह रेखा मंगल रेखा बृहस्पति रेखा बुध रेखा सूर्य सूर्य मुद्रिका शनि मुद्रिका गुरु मुद्रिका शुक्र मुद्रिका त्रिकोण जाली चतुष्कोण मणिबंध रेखाएं हाथ पर अन्य चिन्ह धब्बे तिल आदि सभी का निरीक्षण करना चाहिए

11. जातक के हाथ में पर्वतों की स्थिति का भी निरीक्षण करना चाहिए क्योंकि पर्वतों का निरीक्षण करने के बिना हस्तरेखा में फलादेश करवाना उचित नहीं है परीक्षक को देखना चाहिए कि कौन सा ग्रह उन्नत है या कौन सा ग्रह दबा हुआ है उसकी स्थिति किस प्रकार की है

12. हस्तरेखा शास्त्री को मैग्नीफाइंग ग्लास का उपयोग करते हुए जातक के हस्त में स्थित है गोंड रेखाएं छुपी हुई रेखाओं को भी देखना चाहिए क्योंकि कुछ रेखाएं ऐसी होती है जिनको देख पाना संभव नहीं हो पाता अतः मैग्निफाइंग ग्लास का उपयोग करना चाहिए

13. मात्र एक रेखा देखकर ही निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए हाथ में स्थित अन्य लक्षणों को भी देखना चाहिए प्रत्येक रेखा ग्रह चिन्ह उनके लक्षण को देखना चाहिए


14. परीक्षकों जातक के दोनों ही हाथों को देखना चाहिए यदि स्त्री है क्योंकि यदि प्रथम हाथ पर लक्षण स्पष्ट नहीं दिखाई दे रहे हैं तोल इतिहास का निरीक्षण करना चाहिए

15. जो इस्त्री या पुरुष जिस हाथ से कार्य करते हैं उसी रात को देखना चाहिए

16. पुरुष का राइट हैंड तथा स्त्री का लेफ्ट एंड देखना चाहिए यदि स्त्री भी कामकाजी है तो उसका भी राइट हैंड ही देखा जाएगा

17. हस्तरेखा शास्त्री को जातक को फलित कहने से पूर्ण अपने इष्ट देव का स्मरण करते हुए ही फलित कहना चाहिए स्मरण करने से अतुल शक्ति डरता अतींद्रिय शक्तियों को ऊर्जा प्रदान होती है हस्तरेखा विद को होस्ट का परीक्षण प्रातः काल ही करना चाहिए क्योंकि प्रातः काल शरीर में रक्त संचालन तीव्रता से होता है जिससे रेखाओं हथेली आदि का रंग सुंदर है स्पष्ट रहता है प्रातः काल के पश्चात हथेली के रंग में अंतर आ जाता है कुछ सूक्ष्म रेखाएं अदृश्य हो जाती है

18. हां देखते समय मस्त परीक्षा को यह ध्यान रखना चाहिए कि हाथ के रंग उंगली अंगूठा नाखून सभी का निरीक्षण करने के पश्चात ही प्रमुख रेखाएं वह ग्रह देखने चाहिए तथा पूर्ण हाथ का निरीक्षण करने के पश्चात फलित कहना चाहिए

यह हस्तरेखा शास्त्र के हस्त परीक्षण से पूर्व के कुछ नियम हैं दोस्तों यदि यह जानकारी आप लोगों को अच्छी लगी है तो इस लिंक को शेयर करें हस्तरेखा की अन्य जानकारी के लिए आप मेरा YouTube चैनल एस्ट्रो गार्डन देख सकते हैं तथा उसको सब्सक्राइब कर सकते हैं

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